पीड़ितों की शिकायतें फेज-2 थाना पुलिस के पास पहुंची। शुरुआती जांच के बाद आरोपी सौरभ को गिरफ्तार किया गया। डीसीपी ने बताया कि आरोपी इतने शातिर तरीके से लोगों को फंसाते थे कि शिकायतकर्ता को यह आभास तक नहीं होता था कि वह एक सुनियोजित धोखाधड़ी का शिकार हो रहा है। आरोपियों के कई खातों की जानकारी मिली है जिनमें रकम फ्रीज करवाई गई है। इंजीनियर ने बनाई थी ठग कंपनी, भाई संभाल रहा था : पुलिस के मुताबिक ठगी की इस कंपनी की पूरी रुपरेखा गौरव ने बनाई थी। गौरव ने कंप्यूटर साइंस में बीटेक किया हुआ है। पिछले महीने उसे साइबर अपराध से जुड़ी एक प्राथमिकी जांच में गाजियाबाद पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था। इसके बाद उसका भाई सौरभ जो कि 10 वीं पास है इस कंपनी को संभाल रहा था। पुलिस का कहना है कि इन दोनों आरोपियों की मां की भूमिका को लेकर भी जांच की जा रही है।
सोशल मीडिया पर पोस्ट करने थे विज्ञापन: पुलिस की जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने लोगों को फंसाने के लिए कई तरह से विज्ञापन जारी किए थे। हर दिन सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफार्म पर विज्ञापन जारी किए जाते थे। इसके अलावा पोस्टर भी लगवाए थे। विज्ञापन में अधिक मुनाफे की बात देखकर लोगों ने निवेश करना शुरू कर दिया। निवेशकों से गौरव रुपये तो ले लिया करता था लेकिन ई स्कूटी खरीदने के बजाय रुपये अन्य काम में लगाया दिया करता था।

