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ग्रेटर नोएडा: इलाज के खर्च की राशि का भुगतान करेगी बीमा कंपनी

इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती किए जाने की आवश्यकता नहीं होने का तर्क देकर बीमा कंपनी क्लेम देने से इंकार नहीं कर सकती। ऐसे ही एक मामले में जिला उपभोक्ता आयोग ने बीमा कंपनी को इलाज के खर्च की राशि छह प्रतिशत ब्याज सहित अदा करने का आदेश दिया है। नोएडा के शाहपुर गोवर्धनपुर खादर निवासी गिरीश शर्मा और उनकी पत्नी दर्शन शर्मा ने ओबीसी बैंक के माध्यम से चोला मण्डलम एमएस जनरल इंश्योरेंस कंपनी से तीन लाख रुपये का पारिवारिक स्वास्थ्य बीमा कराया था। यह पॉलिसी 16 मई 2019 से 15 मई 2020 तक प्रभावी थी। पॉलिसी का प्रीमियम बैंक द्वारा उनके खाते से नियमित रूप से काटा जाता रहा। गिरीश शर्मा की पत्नी को कई दिनों से बुखार था। जिसके चलते 18 अगस्त 2020 को उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया। इलाज और भर्ती की सूचना बीमा कंपनी को दी गई, लेकिन बीमा कंपनी ने पॉलिसी के तहत इलाज से इंकार कर दिया। इसके बाद इलाज का पूरा खर्च उन्हें स्वयं वहन करना पड़ा।
इलाज के बाद 30 दिनों के भीतर अस्पताल के बिल और अन्य आवश्यक दस्तावेज बीमा कंपनी को भेजकर क्लेम के लिए आवेदन किया गया। बीमा कंपनी ने यह कहते हुए क्लेम अस्वीकार कर दिया कि कोविड काल में बुखार होने पर घर पर रहकर भी इलाज संभव था और अस्पताल में भर्ती होने की आवश्यकता नहीं थी। मामले की सुनवाई के दौरान आयोग ने प्रस्तुत तथ्यों का अवलोकन करते हुए कहा कि मरीज के इलाज और भर्ती का निर्णय उसकी स्थिति के अनुसार चिकित्सक ही ले सकता है। बीमा कंपनी यह तय नहीं कर सकती कि मरीज का इलाज किस प्रकार किया जाना चाहिए। आयोग ने माना कि इलाज का खर्च न देकर बीमा कंपनी ने सेवा में कमी की है। जिला उपभोक्ता आयोग ने बीमा कंपनी को आदेश दिया है कि वह 30 दिनों के भीतर इलाज खर्च की 60 हजार रुपये की राशि छह प्रतिशत ब्याज सहित अदा करे।

By Ankshree

Ankit Srivastav (Editor in Chief )