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दिल्ली हाईकोर्ट: सहमति से बने रोमांटिक रिश्तों को अपराध बनाना नहीं

दिल्ली हाईकोर्ट ने एक फैसले में 19 वर्षीय आरोपी को पॉक्सो एक्ट के तहत दर्ज मामले में नियमित जमानत दे दी है। अदालत ने स्पष्ट किया कि यह कानून नाबालिगों को यौन शोषण और दुरुपयोग से बचाने के लिए बनाया गया है, न कि युवाओं के बीच सहमति से बने रोमांटिक रिश्तों को अपराधी बनाने के लिए।

न्यायमूर्ति विकास महाजन की एकल पीठ ने सोनू हलधर नाम के युवक को जमानत देते हुए यह आदेश दिया। कोर्ट ने कहा कि पॉक्सो एक्ट का इरादा 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को यौन शोषण से सुरक्षा प्रदान करना है, न कि निकट आयु के युवकों के बीच स्वैच्छिक संबंधों को दंडनीय बनाना। मामले के अनुसार, आरोपी और पीड़िता (जो नाबालिग थी) के बीच एक स्वैच्छिक रोमांटिक रिश्ता था। संबंध के दौरान पीड़िता गर्भवती हो गई, जिसके बाद मामला दर्ज हुआ। आरोपी और पीड़िता की उम्र में ज्यादा फर्क नहीं था। दोनों के संबंध स्वेच्छा से थे।

अदालत ने कहा पूर्व-ट्रायल हिरासत दंडात्मक नहीं हो सकती। संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार को पॉक्सो एक्ट के उद्देश्यों के साथ संतुलित करना होगा। कोर्ट ने यह भी दोहराया कि आरोपी की निरंतर हिरासत मामले की परिस्थितियों में जरूरी नहीं थी। जमानत देते हुए कोर्ट ने कुछ शर्तें लगाई हैं, जैसे अभियोजन गवाहों से कोई छेड़छाड़ न करना और ट्रायल कोर्ट में आवश्यक रूप से पेश होना। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ये टिप्पणियां केवल जमानत चरण तक सीमित हैं और ट्रायल पर कोई असर नहीं डालेंगी।

By Ankshree

Ankit Srivastav (Editor in Chief )