तपेदिक (टीबी) को जड़ से खत्म करने के लक्ष्य के साथ उत्तर प्रदेश सरकार फरवरी से 100 दिनों का एक विशेष और इंटेंसिव अभियान शुरू करने जा रही है। इस ‘विशेष सघन टीबी रोगी खोज अभियान’ के तहत राज्य के हर कोने में टीबी मरीजों की पहचान कर समय पर इलाज सुनिश्चित किया जाएगा। अभियान की खास बात यह है कि इसमें सांसदों से लेकर पार्षदों तक जनप्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी तय की गई है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर स्वास्थ्य महानिदेशक डॉ. आरपी सिंह सुमन ने सभी जिलों के मुख्य चिकित्सा अधिकारियों को विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इसके तहत अगले दो महीनों में सांसदों के साथ जिला स्तरीय समीक्षा बैठकें होंगी, वहीं विधायक, एमएलसी, ग्राम प्रधान और पार्षद भी अभियान से जोड़े जाएंगे।
अभियान के दौरान जांच को लेकर भी स्पष्ट लक्ष्य तय किए गए हैं। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में ओपीडी के 5 प्रतिशत और जिला अस्पतालों व मेडिकल कॉलेजों में आने वाले 10 प्रतिशत मरीजों को टीबी जांच के लिए भेजना अनिवार्य होगा। आयुष्मान आरोग्य मंदिरों के माध्यम से जांच सैंपल को प्रयोगशालाओं तक पहुंचाने के लिए सैंपल ट्रांसपोर्ट की व्यवस्था की जाएगी।
सरकार स्थानीय एनजीओ, कॉरपोरेट संस्थानों और संगठनों को ‘निःक्षय मित्र’ बनने के लिए प्रेरित करेगी, ताकि मरीजों को पोषण और अन्य जरूरी सहायता मिल सके।
अभियान में बुजुर्गों और गंभीर बीमारियों से जूझ रहे लोगों की प्राथमिकता के आधार पर स्क्रीनिंग होगी। इसके अलावा सभी जेलों और मलिन बस्तियों में टीबी जांच के निर्देश दिए गए हैं। फैक्ट्रियों में काम करने वाले श्रमिकों के लिए विशेष शिविर लगाए जाएंगे, वहीं परिवहन विभाग के चालकों और कंडक्टरों की भी जांच कराई जाएगी।
टीबी को लेकर सामाजिक जागरूकता बढ़ाने के लिए प्राथमिक विद्यालयों से लेकर विश्वविद्यालयों तक विशेष कार्यक्रम होंगे। निबंध और पोस्टर प्रतियोगिताओं के जरिए छात्रों को बीमारी के लक्षण और बचाव की जानकारी दी जाएगी। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को भी प्रशिक्षण देकर घर-घर स्क्रीनिंग में लगाया जाएगा।
स्वास्थ्य सचिव डॉ. पिंकी जोवल के अनुसार, 7 दिसंबर 2024 से चल रहे पिछले सघन अभियान के चलते 2015 की तुलना में प्रति लाख मरीजों की संख्या और टीबी से होने वाली मौतों में 17 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। इसी सफलता को आगे बढ़ाने के लिए फरवरी से नया अभियान शुरू किया जा रहा है।
योगी सरकार इलाज के बाद मरीजों के पुनर्वास पर भी ध्यान दे रही है। स्वास्थ्य विभाग ने कौशल विकास विभाग से अनुरोध किया है कि टीबी मरीजों को प्राथमिकता के आधार पर प्रशिक्षण देकर रोजगार से जोड़ा जाए, ताकि वे स्वस्थ होकर आत्मनिर्भर बन सकें। इस अभियान में ‘माई भारत’ वॉलंटियर्स और पंजीकृत निःक्षय मित्रों का भी सहयोग लिया जाएगा।