आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 ने बच्चों में बढ़ती डिजिटल लत पर गंभीर चिंता जताई है। रिपोर्ट के अनुसार, इंटरनेट मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य, पढ़ाई व सामाजिक जीवन को प्रभावित कर रहे हैं। सरकार ने उम्र सत्यापन और सुरक्षित डिजिटल उपकरणों को बढ़ावा देने की सिफारिश की है। ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में प्रतिबंध लागू हैं, जबकि भारत में भी जागरूकता बढ़ रही है। सर्वेक्षण में मोटापे को भी एक बड़ी सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती बताया गया है, जिसके लिए आहार सुधार की आवश्यकता है।
देश में बढ़ती डिजिटल लत को लेकर सरकार ने गंभीर चिंता जताते हुए इसके नियमन की जरूरत बताई है। संसद में पेश आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 में कहा गया है कि इंटरनेट मीडिया और अन्य ऑनलाइन प्लेटफार्म पर बच्चों और किशोरों की बढ़ती निर्भरता उनके मानसिक स्वास्थ्य, पढ़ाई और सामाजिक जीवन पर बुरा असर डाल रही है।
इस समस्या से निपटने के लिए सर्वेक्षण ने आनलाइन कंपनियों को उम्र सत्यापन के लिए जिम्मेदार बनाने और बच्चों के लिए सरल व सुरक्षित डिजिटल उपकरणों को बढ़ावा देने की सिफारिश की है। भारत सरकार के मुख्य आर्थिक सलाहकार वी अनंत नागेश्वरन ने आर्थिक सर्वेक्षण में कहा कि बच्चों को डिजिटल लत से बचाने में परिवारों को अहम भूमिका निभानी होगी।
गौरतलब है कि दुनियाभर में छोटे बच्चों के लिए इंटरनेट मीडिया को खतरनाक बताया जा रहा है। आस्ट्रेलिया और फिनलैंड ने 15 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए इंटरनेट मीडिया पर प्रतिबंध के लिए जहां कानून लागू कर रखा है, वहीं फ्रांस की नेशनल असेंबली में ऐसा कानून लाने पर सहमति बनी है।
अन्य देश भी कर रहे अध्ययन
वहीं ब्रिटेन, डेनमार्क और ग्रीस इस मुद्दे पर व्यापक अध्ययन कर रहे हैं। दुनिया के दूसरे नंबर के स्मार्टफोन बाजार, भारत के लिए ये खास चिंता का विषय इसलिए भी है, क्योंकि देश में सालाना 75 करोड़ से ज्यादा स्मार्टफोन बिकते हैं।