- 2023 में कुल 24,481 लोग लापता हुए, जिनमें से 17,599 मिले
- 2024 में 24,893 लोग लापता हुए और 16,416 का पता चला
- 2025 में 24,508 लापता मामलों में 15,421 लोग मिले
भले ही लापता होने का आंकड़ा घट रहा है, लेकिन मिलने की दर में अपेक्षित सुधार नहीं हो पाया है। दिल्ली पुलिस का कहना है कि राजधानी में लापता मामलों का फ्री रजिस्ट्रेशन सिस्टम लागू है। किसी बच्चे या व्यक्ति के लापता होने की सूचना मिलते ही तुरंत मामला दर्ज किया जाता है, भले ही वह कुछ ही समय में घर लौट आए। कई बार जब लापता व्यक्ति खुद लौट आता है, तो लोग पुलिस या कोर्ट की कार्रवाई से बचने के लिए इसकी सूचना नहीं देते। इसी वजह से डाटा में लापता मामलों की संख्या अधिक दिखाई देती है। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि दिल्ली में बच्चों या महिलाओं को चोरी करने वाला कोई संगठित गिरोह सक्रिय नहीं है।
45 लोग घर लौटे, पुलिस ने किया संपर्क
दिल्ली पुलिस के विशेष पुलिस आयुक्त (अपराध शाखा) देवेश चंद्र श्रीवास्तव ने बताया कि वर्ष 2024, 2025 और 2026 में लापता हुए लोगों के बारे में बुधवार को सभी थाना पुलिस और एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट को जानकारी जुटाने के निर्देश दिए गए थे। इस दौरान 341 लोगों से फोन पर संपर्क किया गया, जिनमें से 45 लोग अपने घर लौट चुके हैं। पुलिस का कहना है कि लापता मामलों में समय पर सूचना देना बेहद जरूरी है, ताकि रिकॉर्ड अपडेट किया जा सके और वास्तविक आंकड़े सामने आ सकें। दिल्ली में क्यों नहीं लौट पा रहीं महिलाएं?
हर दिन थानों की रजिस्टर बुक में दर्ज होता है एक नाम—किसी का बेटा, किसी की बहन, किसी की बेटी। किसी के लिए वह सिर्फ एक एंट्री होती है, लेकिन किसी परिवार के लिए पूरी दुनिया थम जाने जैसा पल। दिल्ली पुलिस के आंकड़ों के मुताबिक जनवरी महीने में 1116 महिलाएं लापता हुईं, लेकिन उनमें से सिर्फ 354 का ही पता चल सका। यानी हर तीन में से दो महिलाएं अब भी अपने घर नहीं लौटीं। सवाल सिर्फ आंकड़ों का नहीं है, सवाल उन चेहरों का है जो इन संख्याओं में गुम हो गए हैं। कई महिलाएं काम पर जाती हैं, कुछ पढ़ाई के लिए निकलती हैं, तो कुछ घरेलू विवाद या पारिवारिक दबाव में घर छोड़ देती हैं। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि बड़ी संख्या में महिलाएं स्वेच्छा से भी घर से चली जाती हैं, लेकिन हालात उन्हें वापस लौटने नहीं देते। सामाजिक डर, आर्थिक असहायता और पहचान का संकट उनके रास्ते रोक देता है। किशोरियां और कानून का जाल
किशोरियों के लापता होने पर कानून उन्हें अपहरण की श्रेणी में रखता है। कई मामलों में ये लड़कियां दोस्तों या जान-पहचान वालों के साथ चली जाती हैं, लेकिन कानूनी प्रक्रिया लंबी और जटिल हो जाती है। इस दौरान परिवार, पुलिस और समाज—तीनों असमंजस में रहते हैं।

