जनरल कृष्णास्वामी सुंदरजी: युद्धभूमि पर निर्णायक नेतृत्व का प्रतीक
1927 में मिसूरी नदी के किनारे कर्नल लीवनवर्थ ने एक पोस्ट स्थापित किया था जो संघर्षरत अमेरिकी मूलनिवासी जनजातियों के बीच शांति बनाए रखने में सहायक था। यह स्थल समय के साथ वाशिंगटन डीसी के पश्चिम में अमेरिका का दूसरा सबसे पुराना सेना ठिकाना बन गया। लेकिन इसे अमेरिकी सेना के बौद्धिक केंद्र के रूप में अधिक जाना गया।
फोर्ट लीवनवर्थ, कैंसास में स्थित यूनाइटेड स्टेट्स आर्मी कमांड एंड जनरल स्टाफ कॉलेज (CGSC) अमेरिकी सेना का एक स्नातकोत्तर विद्यालय है, जो दुनिया भर से सैन्य अधिकारियों का चयन करता है। 1967-68 में, जनरल सुंदरजी ने अमेरिका के फोर्ट लीवनवर्थ में इस प्रतिष्ठित कॉलेज में वरिष्ठ अधिकारियों के लिए आयोजित प्रिवेंटिव मेंटेनेंस कोर्स में भाग लिया। इसके अलावा, उन्होंने फोर्ट नॉक्स, केंटकी में भी प्रशिक्षण प्राप्त किया। सुंदरजी को CGSC के अपने रिपोर्ट में उच्चतम रैंकिंग दी गई और उन्हें NATO सेना कमान के लिए उपयुक्त घोषित किया गया, जो किसी भारतीय अधिकारी के लिए एक विशिष्ट सम्मान था।
फोर्ट लीवनवर्थ में प्रशिक्षण के दौरान
उन्होंने यह सीखा कि युद्ध में प्रौद्योगिकी, गति और गतिशीलता को एक समग्र दृष्टिकोण से समझना आवश्यक है। एक भारतीय अधिकारी के रूप में अमेरिकी सेना के इस प्रतिष्ठित कोर्स में सम्मिलित होना उनके लिए न केवल नई रणनीतियों की खोज थी, बल्कि अपनी दृष्टिकोण की पुष्टि भी। विश्व स्तर के विचारों और रणनीतियों के सम्पर्क ने उनके नेतृत्व को और अधिक प्रभावशाली बनाया।
जनरल कृष्णास्वामी सुंदरजी का जीवन और करियर सैन्य निर्णयों और कुशल नेतृत्व का उत्कृष्ट उदाहरण है, जिसने भारतीय सेना की युद्ध क्षमता को नए आयाम दिए।