दिल्ली विधानसभा का पांचवां विशेष सत्र प्रारंभ, महिला आरक्षण बिल पर जारी है विरोध-प्रतिक्रिया
नई दिल्ली। दिल्ली विधानसभा का पांचवां विशेष सत्र मंगलवार से शुरू हो गया है, जिसमें अनेक महत्वपूर्ण मुद्दों पर गहन चर्चा हो रही है। विधानसभा सुरक्षित वातावरण में संचालित हो रही है और विशेष सुरक्षा प्रबंध किए गए हैं।
विशेष सत्र में भाजपा के विधायक काली पट्टी बांधकर उपस्थित हुए हैं, जो लोकसभा में महिला आरक्षण संशोधन बिल के असफल होने के विरोध में उनका विरोध प्रदर्शन है। नियम 280 के तहत ये विधायक इस प्रतीकात्मक कार्य के माध्यम से अपने निर्वाचन क्षेत्रों की समस्याएं उठाते हुए नारी सशक्तिकरण से जुड़े मुद्दे प्रस्तुत कर रहे हैं। इस सत्र में नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर भी चर्चा होने की संभावना है।
सदन ने संगीत जगत की प्रतिष्ठित पार्श्व गायिका आशा भोसले के निधन पर शोक व्यक्त किया तथा प्रथम विश्व युद्ध में शहीद भारतीय सैनिकों को श्रद्धांजलि स्वरूप एक मिनट मौन रखा। विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने भी 28 अप्रैल 1918 को इसी भवन में हुए ऐतिहासिक युद्ध सम्मेलन का स्मरण किया जिसमें संपूर्ण देश से 120 प्रतिनिधि उपस्थित थे, जिनमें राजसी व नेता प्रतिनिधि भी शामिल थे।
दिल्ली सरकार के मंत्री प्रवेश वर्मा ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि संसद में महिलाओं के अधिकारों के लिए लड़ा गया यह संघर्ष प्रधानमंत्री की दीर्घकालीन मेहनत का फल है, लेकिन विपक्ष द्वारा इसे अस्वीकार करना एक बड़ा झटका है। उन्होंने बताया कि विधानसभा में इस पर निंदा प्रस्ताव लाया जाएगा, जिससे यह संदेश दिया जाएगा कि दिल्ली सरकार महिला सशक्तिकरण के समर्थन में दृढ़ता से खड़ी है।
मंत्री कपिल मिश्रा ने कहा कि यह विशेष सत्र महिलाओं के प्रति सम्मान व्यक्त करने का एक ऐतिहासिक अवसर था, जिसे संसद में दरकिनार कर दिया गया। मुख्यमंत्री इस विषय पर प्रस्ताव प्रस्तुत करेंगी और सदन में विश्वासघात के खिलाफ व्यापक चर्चा होगी।
भाजपा विधायक अभय वर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री के नेतृत्व में महिलाओं के अधिकारों की लड़ाई विधानसभा में मजबूती से लड़ी जाएगी। वहीं, विधायक हरीश खुराना ने विपक्ष पर महिला आरक्षण बिल को रोकने का आरोप लगाते हुए कहा कि भाजपा इसे पास कराने में सक्षम है और सभी महिलाओं को उनका अधिकार दिलाएगी।
मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि उसने महिलाओं के अधिकार छिन लिए हैं और अब न्यायसंगत आरक्षण के लिए संकल्पित होकर यह निंदा प्रस्ताव सदन में प्रस्तुत किया जाएगा। उन्होंने महिला आरक्षण को आवश्यक बताते हुए महिलाओं को उनका अधिकार देने की आवश्यकता पर बल दिया।
विशेष सत्र से पूर्व मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व में भाजपा विधायकों ने संसद में महिला आरक्षण विधेयक पारित न होने के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया, जो इस विषय की संवेदनशीलता और गंभीरता को दर्शाता है।
इस प्रकार, दिल्ली विधानसभा का यह विशेष सत्र न केवल स्थानीय स्तर पर बल्कि देशव्यापी महिला सशक्तिकरण के मुद्दे पर भी केंद्रित है, जिसमें सभी पक्ष अपनी अपनी आवाज़ प्रभावशाली ढंग से उठा रहे हैं।