बनाशंकरि भूखंड मालिकों को नगर नियोजन और वन संरक्षण के बीच समस्या का सामना
बनाशंकरि छठे चरण के सैकड़ों भूखंड मालिक अपने सपनों का घर बनाने में असमर्थ हैं, क्योंकि तुरहल्लि वन क्षेत्र के आसपास के बफ़र ज़ोन नियम उनके रास्ते में बाधा बन गए हैं। इस समस्या के समाधान के लिए बेंगलुरु विकास प्राधिकरण (BDA) ने वन विभाग का रुख किया है।
बीडीए के अनुसार, लगभग 300 से अधिक भूखंड ऐसे हैं जिन्हें कई वर्ष पूर्व आवंटित किया गया था, लेकिन बफ़र ज़ोन के कारण निर्माण कार्य रुका हुआ है। इस प्रतिबंध के चलते भूखंड स्वामियों की जबरदस्त वित्तीय और भावनात्मक हानि हो रही है।
बनाशंकरि का तुरहल्लि वन क्षेत्र, जो शहर के लिए हरा-भरा रहना अत्यावश्यक है, इसकी सुरक्षा हेतु कड़े नियम बनाए गए हैं। बफ़र ज़ोन का उद्देश्य वन्य जीवों और पर्यावरण की रक्षा करना है। हालांकि, यह नीति भूखंड मालिकों को घर निर्माण से रोक रही है, जिससे वे न्यायिक और प्रशासनिक स्तर पर समाधान की तलाश में हैं।
बीडीए ने इस समस्या को वन विभाग के समक्ष स्थायी हल निकालने के लिए रखा है ताकि पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ भूखंड मालिकों के अधिकारों और हितों का संरक्षण भी संभव हो सके। वे चाहते हैं कि नियमों में आवश्यक संशोधन कर भूखंड मालिकों के निर्माण कार्य को वैध और सुरक्षित बनाया जाए।
स्थानीय अभिभावकों और हितधारकों ने भी इस मुद्दे पर अपनी चिंता व्यक्त की है, जो भूखंडों के ज़मीनी सत्यापन और तकनीकी पुनर्मूल्यांकन की मांग कर रहे हैं। वन विभाग का जवाब अभी तक स्पष्ट नहीं है, लेकिन दोनों पक्ष भविष्य में सहयोग से समाधान निकालने पर सहमत हैं।
यह मामला शहर के शहरी विस्तार, पर्यावरण संरक्षण और नागरिक अधिकारों के बीच संतुलन स्थापित करने की चुनौती को सामने लाता है। बनाशंकरि के भूखंड मालिकों की इस समस्या का निराकरण, स्थानीय प्रशासन की संवेदनशीलता और कुशलता की परीक्षा होगा।