कोविड युग का वर्क-फ्रॉम-होम पुनर्जीवित करें, ईंधन बचाएं, विदेशी यात्रा टालें: मोदी की आर्थिक दृष्टि
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को देशवासियों से कोविड-19 महामारी के दौरान अपनाए गए कुछ कार्य-से-घर (वर्क-फ्रॉम-होम) प्रथाओं को पुनर्जीवित करने, ईंधन की खपत कम करने और अनावश्यक विदेशी यात्रा से बचने का आह्वान किया। यह कदम वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं और पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के बीच भारत की आर्थिक मजबूती के लिए आवश्यक है।
हैदराबाद में आयोजित एक कार्यक्रम में मोदी ने संकट के इस दौर में ‘‘राष्ट्रीय उत्तरदायी’’ जीवनशैली अपनाने की सलाह दी और कहा कि लोगों को ‘‘देश को सर्वोपरि रखना चाहिए।’’ उन्होंने यह भी कहा कि हमें अपनी दिनचर्या में वह बदलाव लाना होगा जो देश की आर्थिक सुरक्षा के लिए फायदेमंद हो।
पश्चिम एशिया संघर्ष के कारण होर्मुज जलसंधि में परिचालन बाधित होने के साथ ऊर्जा उत्पादों की कीमतें बढ़ रही हैं। ऐसे में, मोदी ने कहा कि पेट्रोलियम उत्पादों का आयात सिर्फ आवश्यकता के अनुसार किया जाना चाहिए जिससे देश की अर्थव्यवस्था पर असर को सीमित किया जा सके।
भारत अपनी कच्चे तेल की लगभग 88% और प्राकृतिक गैस की करीब आधी जरूरतें आयात करता है, जिनमें से अधिकांश माल होर्मुज जलसंधि के माध्यम से आता है, जो वर्तमान संकट के चलते प्रतिबंधित हो चुकी है।
प्रधानमंत्री ने यह भी सुझाव दिया कि जहां मेट्रो उपलब्ध हों, वहां मेट्रो का उपयोग करें, कारपूलिंग के जरिए यात्रा करें, और माल ढुलाई के लिए रेलवे नेटवर्क का अधिक से अधिक इस्तेमाल करें। इससे ईंधन की बचत होगी और पर्यावरण पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
उन्होंने साथ ही स्वदेशी वस्तुओं के उपयोग को बढ़ावा देने, रसोई गैस और कुकिंग ऑयल के उपभोग में कटौती करने सहित अन्य उपायों को अपनाने का आग्रह किया, जो देश की आर्थिक स्थिरता में सहायक सिद्ध होंगे।
इस प्रकार मोदी ने देशवासियों को वर्तमान वैश्विक चुनौतियों के बीच ‘‘देश प्रथम’’ के सिद्धांत के साथ व्यावहारिक कदम उठाने का संदेश दिया है, जो न केवल तत्काल आर्थिक दबाव को कम करेगा बल्कि दीर्घकालीन राष्ट्रविकास में भी योगदान देगा।