राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (एनटीए) द्वारा आयोजित नीट-यूजी 2026 परीक्षा के पेपर लीक मामले के बाद मुंबई में छात्र प्रदर्शन हुए। प्रदर्शनकारियों ने परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की। यह घटना चिकित्सा प्रवेश परीक्षा की विश्वसनीयता पर प्रश्न चिन्ह लगाती है।
विद्यार्थियों ने कहा कि महीनों की तैयारी और कड़ी मेहनत इस विवाद के कारण व्यर्थ हो गई है। आरोप लगाया गया कि एनटीए ने परीक्षा को सुरक्षित ढंग से आयोजित करने में पर्याप्त सतर्कता नहीं बरती। प्रदर्शनकारियों ने परीक्षा के संगठन में शामिल अधिकारियों की जवाबदेही की मांग की।
एनटीए ने हाल ही में कई प्रश्नों के लीक “गेस पीपर” से मेल खाने की रिपोर्ट के बाद नीट-यूजी 2026 परीक्षा रद्द कर दी। यह निर्णय देश भर के 24 लाख से अधिक छात्रों को प्रभावित करता है और विभिन्न शहरों में विरोध प्रदर्शन का कारण बना।
छात्रों और माता-पिता ने संशोधित परीक्षा कार्यक्रम के बारे में अनिश्चितता व्यक्त की, जिससे प्रतियोगी मेडिकल प्रवेश परीक्षा की तैयारी कर रहे छात्रों में मानसिक तनाव बढ़ गया है। बार-बार हो रही परीक्षा अनियमितताएं छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डाल रही हैं।
कुछ छात्र संघों ने इस पेपर लीक मामले की सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच की मांग की है और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए परीक्षा प्रणाली में बड़े सुधारों की आवश्यकता जताई है। इस विवाद ने नीट परीक्षा की सुरक्षा और निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं, जो मेडिकल शिक्षा के भविष्य के लिए चिंता का विषय है।