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नोएडा: जांच में 2500 से ज्यादा रजिस्ट्रियों में गलत पैन नंबर के उपयोग का मामला सामने आया

  • जिले के रजिस्ट्री विभाग में आयकर की जांच में 2500 से ज्यादा रजिस्ट्रियों में गलत पैन नंबर के उपयोग का मामला सामने आया था। इसके बाद सरकार ने सालों से चली आ रही व्यवस्था में बदलाव कर फर्जीवाड़े पर लगाम लगाया और फरवरी से बिना पैन-आधार सत्यापन के रजिस्ट्रियां बंद कर दी। आयकर की जांच में सामने आया था कि चार वर्षों में एक हजार से ज्यादा मामलों में गलत टाइपिंग और अन्य त्रुटियों से पैन नंबर गलत फीड हुए थे।
ये रजिस्ट्रियां एजेंटों व बैनामा लेखकों के जरिए हुईं थीं। रजिस्ट्री के वक्त खसरे की दूसरी जगह रजिस्ट्री हुई, जिनमें गलत पैन कार्ड लगाया गया। यह पैन कार्ड या तो गलत निकले या रजिस्ट्री कराने वाले के नाम से नहीं मिले। इसके बाद आयकर विभाग ने रजिस्ट्री विभाग से पिछले कुछ समय के दस्तावेज मांगे।

 

रजिस्ट्री विभाग का कहना है कि उसकी ओर से 3500 से ज्यादा रजिस्ट्री के दस्तावेज आयकर विभाग को उपलब्ध कराए गए। इनमें से सबसे ज्यादा फर्जीवाड़ा गांव की जमीनों में पकड़ी गई। फर्जीवाड़े को समाप्त करने के लिए रजिस्ट्री विभाग ने पैन-आधार के सत्यापन को अनिवार्य कर दिया।

 

हर काउंटर पर बायोमेट्रिक जांच उपकरण

फरवरी से विभाग ने हर काउंटर पर बायोमेट्रिक जांच के उपकरण उपलब्ध कराए। ऐसे में अब उसी व्यक्ति का पैन या आधार उपयोग में लाया जा सकेगा, जिसके नाम पर रजिस्ट्री होनी है। कई मामलों में रजिस्ट्री करने वाले के हाथों की लकीरें जब मैच नहीं करती या अन्य समस्या आती है तो आइरिस मशीन से आंखों को स्कैन कर उनका पैन-आधार का सत्यापन किया जाता है।

 

रजिस्ट्री विभाग में हर गतिविधि की निगरानी करने के लिए सीसीटीवी कैमरे बढ़ाए गए हैं। इसके अलावा एक समर्पित टीम लगाई गई जो तकनीकी समस्या को मिनटों में दूर करने के लिए प्रतिबद्ध है।

 

विभाग के पास सालों से नहीं था पैन की जांच का अधिकार

रजिस्ट्री विभाग के अधिकारियों का कहना है कि उनके पास रजिस्ट्री करने और स्टांप ड्यूटी पूरी देने की जांच करने का अधिकार है। हालांकि, पैन किसका उपयोग किया जा रहा है, यह जांच करने का अधिकार विभाग के पास नहीं था।

 

क्या क्या हुए बदलाव

पैन-आधार का बायोमेट्रिक सत्यापन शुरू

आइरिस मशीन से आंखों की स्कैनिंग कर सत्यापन

By Ankshree

Ankit Srivastav (Editor in Chief )