शहद निर्यात और सीईपीए वार्ता में सफलता: पीयूष गोयल ने सरकार की उपलब्धियों का संक्षिप्त परिचय दिया
नई दिल्ली। केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने बुधवार को देश की आर्थिक प्रगति और सरकार की प्रमुख उपलब्धियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने पिछले दस दिनों के दौरान हुए निर्यात संवर्धन, मुक्त व्यापार समझौतों की समीक्षा और वैश्विक निवेश से जुड़ी प्रगतियों का ब्यौरा दिया।
पीयूष गोयल ने बताया कि असम के ‘वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट’ (ओडीओपी) योजना के तहत पहली बार शहद का अमेरिका को निर्यात किया गया है। इसके साथ ही भारत और कनाडा के बीच व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (सीईपीए) के दूसरे दौर की सफल वार्ता संपन्न हुई है। यह दोनों ही उपलब्धियां भारत के निर्यात विस्तार और वैश्विक साझेदारी को मजबूत करती हैं।
मंत्री ने बताया कि इस दौरान एयरबस, लोरियल ग्रुप, कैरियर और एलवीएमएच जैसी वैश्विक कंपनियों के साथ भारत में निवेश को लेकर महत्वपूर्ण वार्ताएं हुई हैं। इन वार्ताओं का मकसद भारत में विनिर्माण को बढ़ावा देना, स्थानीय प्रतिभा को आगे लाना और निर्यात क्षमताओं में सुधार करना है।
गोयल ने यह भी उल्लेख किया कि सरकार ने मुक्त व्यापार समझौतों की प्रगति, निर्यात वृद्धि रणनीतियों तथा कृषि और मत्स्य उत्पादों की वैश्विक पहुंच को बेहतर बनाने के लिए सैनिटरी और फाइटोसैनिटरी (एसपीएस) सुविधाओं की समीक्षा की है। यह कदम निर्यातकों को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार सक्षम बनाएगा।
इससे पहले, वाणिज्य मंत्रालय ने कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीईडीए) के सहयोग से असम के बक्सा जिले से 20 मीट्रिक टन शहद के अमेरिका निर्यात की घोषणा की थी। यह पहल स्थानीय मधुमक्खी पालकों और किसानों की आय में वृद्धि और वैल्यू एडेड कृषि निर्यात के प्रोत्साहन के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
सीईपीए वार्ता के दूसरे दौर का आयोजन राष्ट्रीय राजधानी में हुआ और बातचीत सफल रही। इसके अगले चरण की वार्ता जुलाई 2026 में ओटावा, कनाडा में आयोजित की जाएगी।
गोयल ने एलवीएमएच और लोरियल ग्रुप के शीर्ष अधिकारियों के साथ भी विमर्श किया, जिसमें भारत से सोर्सिंग, विनिर्माण, और निर्यात को बढ़ावा देने के अवसरों पर चर्चा हुई। एलवीएमएच ने स्थानीय विनिर्माण को बढ़ाने और देश में निर्यात विस्तार पर बल दिया, जबकि लोरियल ने भारत के सौंदर्य एवं व्यक्तिगत देखभाल क्षेत्र में निवेश योजनाओं को लेकर विस्तार से जानकारी साझा की।
यह सभी पहल और वार्ताएं भारत को विश्व व्यापार मंच पर मजबूती से स्थापित करने की दिशा में उठाए गए महत्वपूर्ण कदम हैं, जिनसे स्थानीय अर्थव्यवस्था को स्थिरता और विकास मिलेगा।