कुनो राष्ट्रीय उद्यान में जन्मे चार चीता शावकों की रहस्यमय मृत्यु
मध्य प्रदेश के कुनो राष्ट्रीय उद्यान में हाल ही में जन्मे चार चीता शावकों के मृत पाए जाने से वन्यजीव संरक्षण जगत में चिंता की लहर दौड़ गई है। ये शावक 11 अप्रैल को इलाकाई क्षेत्र शेओपुर में जन्मे थे, जो कुनो से सटा हुआ है, और ये देश में पुनः शुरू हुई चीता संरक्षण योजना के तहत पहली बार जंगली स्थिति में जन्मे शावक थे।
शिक्षित एवं अनुभवी अधिकारियों के अनुसार, सोमवार को शावकों के क्षत-विक्षत शव जंगल के पास उनके बिल के पास पाए गए, जो इस बात का संकेत है कि उनकी मौत शावकों पर हमले के कारण हुई है। कुनो राष्ट्रीय उद्यान के फील्ड डायरेक्टर उत्तम शर्मा ने ‘हिंदुस्तान टाइम्स’ को बताया, “11 मई तक शावक स्वस्थ और सुरक्षित थे, लेकिन मंगलवार की सुबह उन्हें गहरे घाव और आंशिक रूप से खाए हुए शरीर के साथ मृत पाया गया। प्रारंभिक तौर पर leopard का हमला माना जा रहा है।”
मृत शावकों के शवों को पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा गया है जिससे उनकी मृत्यु का सटीक कारण निर्धारित हो सके। इस बीच, शावकों की माता, जिसे केजीपी-12 नाम दिया गया है, को सुरक्षित पाया गया और वह आसपास के क्षेत्र में घूमती नजर आई।
कुनो राष्ट्रीय उद्यान में जन्मे ये शावक भारत में पुनः स्थापित हुए चीता प्रजाति के लिए एक महत्वपूर्ण घटना थे। सितंबर 2022 में नमीबिया और दक्षिण अफ्रीका से लाए गए चीता सात दशकों बाद भारत में जंगली रूप में पुनः स्थापित किए गए थे। तब से अब तक 33 शावक पैदा हो चुके हैं, जो प्रजाति के संरक्षण के लिए अच्छी खबर थी, लेकिन इन हालिया घटनाओं ने प्राकृतिक खतरों के प्रति सतर्क रहने की आवश्यकता को रेखांकित किया है।
वन्यजीव विशेषज्ञ एवं संरक्षण केन्द्र इस घटना की गंभीरता को समझते हुए आगामी दिन में सुरक्षा उपायों को और अधिक सुदृढ़ करने की योजना बना रहे हैं ताकि जंगली चीता संरक्षण के प्रयास सफल हो सकें। वन विभाग और स्थानीय अधिकारियों द्वारा वन्यजीवों की निगरानी हेतु विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
यह दुखद घटना वन्यजीव संरक्षण के जटिल पहलुओं को भी दर्शाती है, जहां जंगली प्राणियों का जीवन पर्यावरणीय, प्राकृतिक दुश्मनों और मानव हस्तक्षेप दोनों के खतरे में होता है। संरक्षण कार्य को और भी समर्पित एवं विज्ञान सम्मत रूप से अपनाना आवश्यक है ताकि इन संरक्षण योजनाओं में स्थिरता बनी रहे।