यीडा के अधिकारियों का कहना है कि निजी सलाहकार एजेंसी की तलाश शुरू हो गई है। पूर्व में किए गए काम और यमुना सिटी के लिए कंपनी के सुझावों के आकलन के आधार पर कंपनी का चयन होगा। इच्छुक कंपनियों को एक प्रजेंटेशन भी यमुना प्राधिकरण में देना होगा जिससे यमुना सिटी की जरूरत को व्यावहारिक रूप से सर्विस मास्टर प्लान में शामिल कराया जा सके। चयनित कंसल्टेंट की भूमिका सर्विस मास्टर प्लान तैयार करने के अलावा यमुना सिटी फेज-1 में इस प्लान पर काम कराने के लिए भी शामिल रहेगी।
अधिकारियों का कहना है कि यमुना सिटी में तेजी से औद्योगिक और आवासीय उपयोग बढ़ रहा है। अगले दो महीने में करीब 400 कंपनियां यहां अपनी सेवाएं शुरू कर देंगी। इसी के साथ आवासीय गतिविधियां भी यहां बढ़ जाएंगीं। ऐसे में जरूरी है कि सीवरेज निस्तारण के साथ आवश्यक जलापूर्ति और बारिश के पानी के संचयन पर भी काम हो। एसटीपी से भी निकलने वाला पानी बर्बाद न हो। इसके लिए जरूरी उपयोग सुझाना होगा। इस शोधित पानी को धनौरी वेटलैंड तक पहुंचाने की भी योजना यीडा की है।
—-
इन बिंदुओं पर होना है काम
– पूर्व में हुए कामों के बाद जलापूर्ति, सीवरेज नेटवर्क, ड्रेनेज सिस्टम के गैप का आंकलन।
– मौजूदा और भविष्य की जरूरतों का आकलन।
– उपयोग हुए पानी का शोधन कर अधिकाधिक पुर्नउपयोग।
– आधुनिक तकनीक के उपयोग की व्यापक स्तर पर संभावनाओं का सुझाव।
– महायोजना 2041 में तय भू-उपयोग को ध्यान में रखते हुए कार्ययोजना।

