मदरसों में ‘वंदे मातरम’ अनिवार्य करने के फैसले पर मुस्लिम संगठनों की विरोध-प्रतिक्रिया
नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा मदरसों में ‘वंदे मातरम’ गीत को अनिवार्य करने के निर्णय के बाद विभिन्न मुस्लिम संगठनों ने इस फैसले का कड़ा विरोध किया है। यह फैसला धार्मिक संस्थानों की संवेदनशीलता को लेकर व्यापक बहस का विषय बन गया है।
ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने कहा कि बंगाल में मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के कार्यकाल में ऐसे विवादों की बढ़ोतरी हुई है। उन्होंने इस फैसले को असम की तर्ज पर मदरसों को निशाना बनाने की कोशिश बताया। रजवी ने स्पष्ट किया कि कोई भी ‘वंदे मातरम’ गा सकता है, लेकिन इसे अनिवार्य करना गलत है और किसी पर दबाव नहीं डाला जाना चाहिए।
ऑल इंडिया इमाम ऑर्गेनाइजेशन के चीफ इमाम डॉ. उमर अहमद इलियासी ने कहा कि ‘वंदे मातरम’ और ‘मादरे वतन जिंदाबाद’ दोनों में देशभक्ति की भावना निहित है। उन्होंने बताया कि इस्लाम में इबादत सिर्फ ईश्वर के लिए होती है, इसलिए कुछ मुसलमान ‘मादरे वतन जिंदाबाद’ का प्रयोग करते हैं। उन्होंने जोर दिया कि यह राष्ट्रीय गीत है और इसे राजनीति से अलग रखा जाना चाहिए।
डॉ. इलियासी ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नमाज संबंधी बयान को सही ठहराया और कहा कि नमाज मस्जिद में पढ़ी जानी चाहिए न कि सड़कों पर। प्रशासन की अनुमति के बिना सड़क पर नमाज पढ़ना उचित नहीं है।
उन्होंने गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की मांग का स्वागत करते हुए मुस्लिम समाज से प्रतिबंधित जानवरों की कुर्बानी ना करने की अपील की। उनका कहना था कि गाय हिंदुओं की आस्था है और उसके दूध व घी को औषधि के रूप में माना जाता है।
दारुल उलूम फिरंगी महल के प्रवक्ता मौलाना सूफियान निज़ामी ने पश्चिम बंगाल सरकार के फैसले का विरोध करते हुए कहा कि वे मदरसों और स्कूलों में ‘वंदे मातरम’ के अनिवार्य करने की नीति का हिस्सा नहीं हैं। उन्होंने मुसलमानों से आग्रह किया कि ऐसी जगहों पर अपने बच्चों को दाखिला न दें।
एआईएमआईएम के राष्ट्रीय प्रवक्ता वारिस पठान ने कहा कि वे ‘वंदे मातरम’ का सम्मान करते हैं, लेकिन संविधान का अनुच्छेद 25 सभी को अपने धर्म का पालन करने का अधिकार देता है। उन्होंने संकेत दिया कि कुछ पंक्तियाँ इस्लाम के अनुरूप नहीं हो सकतीं।
इस विवाद के बीच, भाजपा नेता गौरव वल्लभ ने कहा कि स्कूल हों या मदरसे, ‘वंदे मातरम’ राष्ट्रीय गीत है जो देशभक्ति की भावना को बढ़ाता है।