महंगाई और ईंधन की बढ़ती कीमतों को लेकर इमरान मसूद ने केंद्र सरकार पर जताई चिंता
नई दिल्ली। कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों और महंगाई को लेकर केंद्र सरकार की नीतियों पर कड़ा हमला बोला। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने इस मुद्दे पर समय रहते संजीदगी नहीं दिखाई तो आने वाले समय में आर्थिक स्थिति और भी बिगड़ सकती है।
कांग्रेस सांसद ने कहा कि देश वर्तमान में गहराते आर्थिक संकट से गुजर रहा है, जो आम जनता के लिए चिंताजनक है। उन्होंने बताया कि सरकार द्वारा अभी तक कोई ठोस रणनीति या बड़ी बैठक नहीं की गई है, जिससे महंगाई की समस्या का समाधान हो सके।
उन्होंने स्पष्ट किया, “झटके धीरे-धीरे लगेंगे। यह तूफान आ रहा है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसे रोक नहीं पाएंगे। उन्होंने देश को आर्थिक मंदी में धकेल दिया है। आने वाले एक-दो महीनों में स्थिति और खराब होने की संभावना है। अगर सरकार इस पर विचार नहीं करेगी तो इसका भारी भुगतान जनता को करना पड़ेगा।”
इमरान मसूद ने समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव के कार्यकर्ताओं को 400 सीटों की तैयारी के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि केवल सीटों की संख्या महत्वपूर्ण नहीं होती, बल्कि चुनाव जीतना सबसे बड़ा लक्ष्य होता है। गठबंधन में हर दल अपनी रणनीति अपने हिसाब से बनाता है और चुनावी तैयारियां उसी के आधार पर की जाती हैं।
उन्होंने कहा कि चुनाव परिणाम जनता के मूड पर निर्भर करते हैं और किसी भी पार्टी द्वारा पहले से यह तय नहीं किया जा सकता कि वे कौन-कौन सी सीटें जीतेंगे या गंवाएंगे। असली लक्ष्य जीत हासिल करना होता है और उसी के लिए सीटें तय की जाती हैं।
देश के राजनीतिक माहौल को देखते हुए इमरान मसूद ने राहुल गांधी के भूमिका को अहम बताया। उनका कहना था कि जनता राहुल गांधी को गरीबों की आवाज मानती है और उन पर भरोसा करती है, जो गठबंधन के लिए महत्वपूर्ण है।
यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर दिए गए बयान और उसके बाद दर्ज एफआईआर पर सवाल किए जाने पर इमरान मसूद ने कहा कि उन्होंने बयान विस्तार से नहीं सुना है, लेकिन एफआईआर दर्ज होना अब प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा बन गया है। उन्होंने कहा, “एफआईआर तो इनके रोज का काम बन गया है। इनके लोग भी लोगों को गाली देते रहते हैं, लेकिन हम एफआईआर नहीं कराते।”
वहीं समाजवादी पार्टी के सांसद राजीव राय ने इस मुद्दे पर कहा, “हम प्रधानमंत्री से असहमत हो सकते हैं और उनके विचारों का समर्थन नहीं कर सकते, लेकिन ऐसी बातें जो राज्य की भाषा और नैतिक मानकों को गिराती हों, उनका समर्थन नहीं किया जा सकता।”