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अगर धर्मेन्द्र प्रधान इस्तीफा दे देते तो क्या होता

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Jul 25, 2026 #source
What if Dharmendra Pradhan resigns?

धर्मेन्द्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर दिल्ली में जारी विरोध प्रदर्शन

अक्टूबर 2023 का वह सप्ताह भारतीय राजनीति के लिए न केवल चुनौतीपूर्ण रहा, बल्कि उसने लोकतंत्र के प्रति जनसाधारण की जागरूकता को भी नया आयाम दिया। दिल्ली पुलिस द्वारा शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान के खिलाफ पेपर लीक मामले में विरोध कर रहे कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को हिरासत में लेने की घटना ने देशव्यापी आंदोलन को जन्म दिया।

20 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे सोनम वांगचुक के जबरन ले जाने ने विरोध प्रदर्शन को चरम सीमा तक पहुंचा दिया। इस घटना ने युवा वर्ग को विशेष रूप से प्रेरित किया, जिसके परिणामस्वरूप विशेषकर दिल्ली से दूर रहने वाले हजारों युवा राजधानी पहुंचकर संसद मार्ग पर विशाल प्रदर्शन कर रहे हैं।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कार्यकाल में पहली बार विरोध प्रदर्शनकारियों ने संसद के मुख्य द्वार तक पहुँचकर अपनी मांगों को जोर-शोर से उठाया। इस दौरान पुलिस ने लाठीचार्ज, आंसू गैस और पेलट गन तक का इस्तेमाल किया, लेकिन इससे विरोध की आग बुझने के बजाय और भड़क गई।

केन्द्रीय दिल्ली विरोध प्रदर्शनों का केंद्र बन चुका है। सरकार ने कई मेट्रो स्टेशनों को बंद कर दिया और इंटरनेट सेवाओं को भी ठप्प कर दिया, ताकि माहौल को नियंत्रित किया जा सके, लेकिन इसके बावजूद विरोध का ज्वार थम नहीं पाया है।

विरोध प्रदर्शन अब केवल काकरोच जनता पार्टी तक सीमित नहीं है, बल्कि विपक्षी दल भी इसे समर्थन दे रहे हैं ताकि राजनीतिक भागीदारी और जनादेश को पुनः स्थापित किया जा सके। यह संघर्ष आगामी राजनीतिक परिदृश्य को गहराई से प्रभावित करेगा।

ऐसे में धर्मेन्द्र प्रधान की भूमिका और उनकी पार्टी की प्रतिक्रिया पर पूरी नज़र बनी हुई है, क्योंकि इस मुद्दे ने पूरे देश में शिक्षा प्रणाली और सरकारी जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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Journalist & Entertainer Ankit Srivastav ( Ankshree)