बिहार के सबसे गरीब जिले के बच्चों को मुफ्त शिक्षा के लिए दूर मदरसों तक भेजने की प्रवृत्ति
हर साल, बिहार के अररिया जिले के बगदहारा गाँव से सद्दाम अपने साथ बच्चों को महाराष्ट्र के लातूर जिले के एक मदरसे में ले जाते हैं। यह मदरसा न केवल मुफ्त शिक्षा प्रदान करता है, बल्कि वहां सद्दाम स्वयं शिक्षक के रूप में कार्यरत हैं।
इस वर्ष अप्रैल में, 100 बच्चों के माता-पिता ने सद्दाम को उनके बच्चों को लातूर के उस मदरसे तक पहुँचाने की जिम्मेदारी सौंप दी। उन्होंने कहा, “मैं भी इसी तरह पढ़ाई किया करता था। मेरे दोस्त और मैं गुजरात के एक मदरसे में दस साल तक पढ़े। हर साल हमारे गाँव का कोई बुजुर्ग हमें ट्रेन से छोडता था।”
११ अप्रैल को सद्दाम बच्चे लेकर पटना स्टेशन से पटना पूर्णा एक्सप्रेस ट्रेन में सवार हुए। उनके साथ उनका छह वर्षीय पुत्र, जो उसी मदरसे में नामांकित था, उनकी पत्नी और तीन पुत्रियां भी थीं।
उतर प्रदेश के दीन दयाल उपाध्याय जंक्शन पर रेलवे पुलिस बल की एक टीम ने उन्हें ट्रेन से उतरने के लिए कहा। उस दिन, अन्य राज्यों के मदरसों को जा रहे कई अन्य बच्चों को भी उतारा गया। पारिवारिक दस्तावेज दिखाने और पुलिस से फोन पर बात करने के बाद उन्हें उसी ट्रेन में फिर सवार होने की अनुमति मिली।
आठ घंटे बाद मध्य प्रदेश में शाम के समय फिर एक बार सभी को उतरने के लिए कहा गया। उस समय रेलवे के अधिकारियों का एक दल मौजूद था।
यह घटना इस तथ्य को उजागर करती है कि क्यों बिहार के गरीबतम जिलों के माता-पिता अपने बच्चों को दूर-दूर मदरसों में मुफ्त और सुरक्षित शिक्षा के लिए भेजते हैं, भले ही यात्रा करना कितना भी कठिन क्यों न हो। मदरसों में शिक्षा के साथ ही बच्चों को संस्कार और रोजगार के अवसर भी दिए जाते हैं, जो इस क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण हैं।
पिछले दशकों से बिहार के कई जिलों में शैक्षिक संस्थानों की कमी रही है, जिससे लोग मजबूर हो जाते हैं कि वे अपने बच्चों को ऐसी जगह भेजें जहां बच्चों का समुचित विकास सुनिश्चित हो सके।
यह कहानी केवल एक परिवार की नहीं है, बल्कि बिहार के कई ग्रामीण और कमजोर तबकों की दशा का परिचायक है जो बेहतर भविष्य के लिए सीमाओं को पार करने को तैयार हैं।
इस संदर्भ में सरकारी प्रयासों की भी आवश्यकता है, ताकि स्थानीय स्तर पर गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के प्रबंध किए जा सकें और परिवारों को इस प्रकार की लंबी यात्राओं से मुक्ति मिल सके।
बच्चों के सुरक्षित परिवहन, शिक्षकों की उपलब्धता और उचित संसाधनों की व्यवस्था जैसे मुद्दों पर ध्यान देना आज की आवश्यकता है, ताकि बिहार के गरीबतम जिलों में शिक्षा का स्तर सामान्य हो सके।