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अभिषेक बनर्जी पर हमला पूर्व नियोजित साजिश, पुलिस मूकदर्शक बनकर बना रही थी वीडियो: कपिल सिब्बल

अभिषेक बनर्जी पर हमला पूर्व नियोजित साजिश, पुलिस मूकदर्शक बनकर बना रही थी वीडियो: कपिल सिब्बल

अभिषेक बनर्जी पर हमला: पूर्व नियोजित साजिश या राजनीतिक विवाद?

नई दिल्ली। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सांसद अभिषेक बनर्जी पर हुए हमले को लेकर राजनीतिक और सामाजिक दोनों ही स्तरों पर बहस तेज हो गई है। वरिष्ठ वकील और राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने इस घटना को पूर्व से रची गई साजिश करार देते हुए स्थानीय पुलिस और प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठाए हैं।

कपिल सिब्बल ने आरोप लगाया कि जिस व्यक्ति ने पत्थर फेंका, उसकी गिरफ्तारी नहीं हुई और घटना की जांच भी उचित रूप से नहीं हुई। उन्होंने कहा कि पुलिस अधिकारी मूकदर्शक बनकर वीडियो बना रहे थे और यह घटना पूर्व नियोजित थी क्योंकि हमलावर अंडे लेकर आए थे। दिन में इस प्रकार की हिंसा अचानक शुरू होना असंभव है और इससे साफ संकेत मिलता है कि यह एक आयोजन था।

सिब्बल ने आगे कहा कि पश्चिम बंगाल में भाजपा सरकार बनने के बाद से हिंसा की घटनाएं बढ़ी हैं और यह संकेत मिलता है कि सत्ता में बदलाव के साथ हिंसा को बढ़ावा दिया जा रहा है। टीएमसी नेताओं पर पत्थरबाजी और धमकाने की घटनाएं इस नई राजनीतिक परिदृश्य की चिंता जनक झलक हैं। उनका कहना था कि इस तरह के हमलों का मकसद टीएमसी नेताओं को राजनीति छोड़ने के लिए मजबूर करना है।

यह हमला पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद बढ़ते तनाव और राजनीति की तीव्रता को दर्शाता है। टीएमसी 15 वर्षों तक राज्य की सत्ता में रही, लेकिन अब विपक्ष के रूप में है, जबकि भाजपा सरकार कानून-व्यवस्था सुधारने का दावा कर रही है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है, और घटना के वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं, जिनमें पत्थरबाजी और अंडे फेंके जाने के दृश्य स्पष्ट रूप से देखे जा सकते हैं।

दूसरी ओर, भाजपा के कुछ नेताओं ने इस हमले को नाटक करार दिया है। भाजपा विधायक अरूप कुमार दास ने सिंगूर में कहा कि टीएमसी अब कोई वास्तविक मुद्दा नहीं छोड़ पाई है और भाजपा की सरकार को जनता ने स्वीकार कर लिया है। वहीं, आसनसोल से भाजपा विधायक अरिजीत रॉय ने भी इस घटना को टीएमसी की चुनी हुई रणनीति बताया और अभिषेक बनर्जी को ‘बंगाल के आतंक के राजा’ के रूप में वर्णित किया। उनके अनुसार, टीएमसी अब जनता द्वारा अस्वीकृत हो चुकी है और वह अपनी सहानुभूति बढ़ाने के लिए इस तरह के नाटक करती रहती है।

इस विवादित घटना ने पश्चिम बंगाल की राजनीतिक स्थिति की नाजुकता को फिर से उजागर किया है, जहां सत्ता परिवर्तन के बाद पूरी तरह से शांति स्थापित करना अभी भी एक चुनौती बनी हुई है। सभी पक्षों की प्रतिक्रियाएं इस बात का संकेत हैं कि भविष्य में राज्य की राजनीति में और तीव्रता देखने को मिल सकती है।

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By admin

Journalist & Entertainer Ankit Srivastav ( Ankshree)