महाराष्ट्र सरकार ने किया 80 लाख महिलाओं को ‘मुख्यमंत्री माझी लड़की बहिन’ योजना से बाहर
महाराष्ट्र में राज्य स्तरीय सत्यापन के बाद लगभग 80 लाख महिलाओं को मुख्यमंत्री माझी लड़की बहिन योजना के लिए अयोग्य पाया गया है। इस पर विपक्ष ने वित्तीय संकट के कारण लाभार्थियों की संख्या घटाए जाने का आरोप लगाया है।
यह योजना जून 2024 में शुरू हुई थी, जिसके तहत 21 से 65 वर्ष की आयु की महिलाओं को जिनके परिवार की वार्षिक आय 2.5 लाख रुपये से कम है, उन्हें मासिक 1500 रुपये का ट्रांसफर दिया जाता है। योजना के अंतर्गत लाभार्थियों की संख्या अप्रैल 30, 2024 की ई-केवाईसी प्रक्रिया पूरी करने की अंतिम तिथि तक 2.4 करोड़ से घटकर लगभग 1.7 करोड़ रह गई है।
सरकारी अधिकारी के अनुसार लाभार्थियों को आठ महीने की अवधि दी गई थी ताकि वे अपनी व्यक्तिगत जानकारी की पुष्टि कर सकें। इस प्रक्रिया को पूरा करने में लगभग 50 से 55 लाख महिलाओं ने विफलता दिखाई, जबकि 2 से 3 लाख ने त्रुटियां सुधारते हुए प्रक्रिया पूरी की।
इसके अतिरिक्त, लगभग 12 लाख महिलाएं ऐसी पाई गईं जिनका वार्षिक आय करदाता के रूप में 2.5 लाख रुपये से अधिक था और 4.5 लाख से अधिक महिलाएं 65 वर्ष की आयु की सीमा पार कर चुकी थीं।
उन्हीं महिलाओं में से लगभग 5 लाख महिलाओं को नमो शेतकारी योजना के तहत भी लाभ मिल रहा था, जिसके कारण वे इस योजना के लिए अयोग्य हो गईं।
इस सत्यापन प्रक्रिया के बाद लाभार्थियों की संख्यात्मक कटौती को लेकर विपक्ष वर्ग ने सरकार पर आर्थिक तंगी का आरोप लगाया है, जबकि सरकार ने यह स्पष्ट किया है कि यह कदम योजना की पारदर्शिता और उपयुक्त वितरण सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक था।
यह योजना सामाजिक सुरक्षा को सुदृढ़ करने हेतु एक महत्वपूर्ण पहल है, और ऐसे संशोधन लाभों के लक्ष्यीकरण को सटीक बनाते हैं।
प्रदेश में महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण के लिए यह योजना उल्लेखनीय प्रयास है, जो अब सत्यापन के बाद औचित्यपूर्ण लाभ वितरण सुनिश्चित करेगी।