सुप्रीम कोर्ट ने थिरुपरंकुंद्रम पहाड़ी पर दीप प्रज्वलन के लिए हिंदू समूह की याचिका खारिज की
सुप्रीम कोर्ट ने मद्रास हाईकोर्ट के उस आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया है जिसमें हिंदू धर्म परिषद की थिरुपरंकुंद्रम पहाड़ी पर दीप प्रज्वलित करने की याचिका को खारिज किया गया था। यह जानकारी Live Law ने साझा की।
हिंदू संगठन ने हाईकोर्ट के 9 अप्रैल के आदेश को चुनौती दी थी, जिसे अदालत ने राजनीतिक लाभ के लिए दायर किया गया माना और इस पर 50,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया था।
मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने इस आदेश में हस्तक्षेप से इनकार करते हुए जुर्माने की राशि को 50,000 रुपये से घटाकर 5,000 रुपये कर दिया। कोर्ट ने कहा कि 50,000 रुपये का जुर्माना अत्यधिक था, जैसा कि Live Law ने बताया।
1 दिसंबर को हाईकोर्ट के न्यायाधीश जीआर स्वामीनाथन ने उल्लेख किया था कि मदुरै के पास थिरुपरंकुंद्रम पहाड़ी पर स्थित पत्थर का खंबा एक दीपस्थान है, जहां पारंपरिक रूप से दीप जलाए जाते थे। उन्होंने आदेश दिया था कि मंदिर को इस अभ्यास को पुनः स्थापित करना चाहिए। यह आदेश ऐसे समय में दिया गया जब मंदिर के कुछ भक्तों ने उस स्थान पर दीप जलाने की अनुमति मांगी थी।
इसके अलावा, स्वामीनाथन ने यह भी माना कि दीप प्रज्वलन की परंपरा पास के मुस्लिम मकबरे के धार्मिक अधिकारों का उल्लंघन नहीं करेगी।
यह पहाड़ी अरुलमिगु सुब्रमणिया स्वामी मंदिर और सिकंदर बादशा दरगाह का स्थल है।
तमिलनाडु सरकार, मंदिर प्रबंधन तथा दरगाह की देखरेख करने वाले निकाय ने, अन्य के साथ मिलकर, एकल न्यायाधीश के आदेश को चुनौती दी थी और कानून-व्यवस्था की स्थिति पर अपनी चिंताएं व्यक्त की थीं।
यह विवाद धार्मिक सहिष्णुता और सांस्कृतिक परंपराओं के बीच संतुलन बनाने की चुनौती को उजागर करता है। मामला फिलहाल उच्च न्यायालय और सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के बाद एक महत्वपूर्ण सामाजिक एवं राजनीतिक बहस बन चुका है।