महाराष्ट्र कैबिनेट ने मंजूर किया प्रशासन का बड़ा पुनर्गठन, 12 नए विभागों का गठन
महाराष्ट्र में शासन व्यवस्था को बेहतर बनाने, फैसलों को त्वरित करने और विभागीय कार्यभार कम करने के लिए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में व्यापक प्रशासनिक पुनर्गठन को मंजूरी मिल गई है। इस पुनर्गठन के तहत सरकार के विभागों की संख्या 33 से बढ़ाकर 45 की जाएगी।
इस योजना के अंतर्गत 13 विभागों का पुनर्गठन होगा और 12 नए प्रशासनिक विभाग बनाए जाएंगे। साथ ही कुछ बड़े विभागों के अंतर्गत कार्यरत उपविभागों को स्वतंत्र विभाग का दर्जा दिया जाएगा। इससे प्रशासन की दक्षता बढ़ेगी और नीति क्रियान्वयन में तेजी आएगी।
प्रमुख बदलाव और नये विभाग
इस पुनर्गठन में कृषि और पशुपालन, सहयोग, विपणन व वस्त्र विभागों का अलग होना प्रमुख है। गृह विभाग में परिवहन विभाग को अलग किया जाएगा तो सामान्य प्रशासन विभाग में प्रोटोकॉल विभाग का गठन होगा। उद्योग, ऊर्जा, श्रम और खनन से संबंधित विभाग भी नए ढांचे के तहत काम करेंगे। राजस्व, वनोपज, राहत व पुनर्वास संबंधी कार्यों के लिए भी अलग-अलग विभाग बनाए जाएंगे। इसी प्रकार शिक्षा, खेल, पर्यटन और सांस्कृतिक मामलों के लिए भी नए उपविभाग गठित किए जाएंगे।
उच्च शिक्षा और वित्तीय सुधार
कैबिनेट ने महाराष्ट्र पब्लिक यूनिवर्सिटीज एक्ट, 2016 में संशोधन कर उच्च शिक्षा क्षेत्र में नए कॉलेजों को मंजूरी देने की प्रक्रिया को सरल और तेज करने का फैसला किया है। इसके साथ ही महाराष्ट्र गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (GST) अधिनियम में भी केंद्र सरकार के GST कानून के अनुरूप संशोधन को मंजूरी दी गई है। यह कदम कर प्रणाली में समन्वय और पारदर्शिता बढ़ाने के उद्देश्य से है।
MIDC को बढ़ाई गई ऋण लेने की क्षमता
महाराष्ट्र इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (MIDC) की वित्तीय क्षमता बढ़ाने के लिए महाराष्ट्र इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट एक्ट, 1961 में भी संशोधन किया गया है। इससे MIDC के लिए अतिरिक्त संसाधन जुटाना संभव होगा ताकि वह भूमि अधिग्रहण, औद्योगिक क्षेत्र विकास, बुनियादी ढांचे और विशेष आर्थिक क्षेत्रों के निर्माण में तेजी ला सके।
सरकारी निर्णयों में तेजी और विकास को बढ़ावा
सरकार का मानना है कि यह प्रशासनिक पुनर्गठन मुख्यमंत्री फडणवीस के शासन में तेज निर्णय प्रक्रिया, व्यवसाय करने में आसानी और जीवन स्तर सुधार के व्यापक एजेंडा का हिस्सा है। इससे विभागों के बीच समन्वय बढ़ेगा, प्रशासनिक अड़चनों में कमी आएगी और नागरिकों को बेहतर सेवाएं मिलेंगी। इसके अलावा, यह औद्योगिक विकास और निवेश आकर्षित करने में भी सहायक होगा।
राज्य सरकार ने भरोसा जताया है कि यह बड़े पैमाने पर परिवर्तन महाराष्ट्र के विकासात्मक जरूरतों के अनुरूप अधिक चुस्त और उत्तरदायी प्रशासनिक प्रणाली का सृजन करेगा।