मूलुंड सॉल्ट पैन भूमि पर प्रस्तावित आवास परियोजना की जांच के आदेश
महाराष्ट्र कोस्टल जोन मैनेजमेंट अथॉरिटी (MCZMA) ने मूलुंड ईस्ट में धारावी पुनर्वास परियोजना प्रभावित निवासियों के लिए प्रस्तावित आवासीय विकास को लेकर जांच आदेशित की है। स्थानीय निवासियों और सॉल्ट पैन प्रोटेक्शन कमेटी की शिकायतों के बाद यह कदम उठाया गया है, जिनका कहना है कि परियोजना का पर्यावरणीय प्रभाव गंभीर हो सकता है।
MCZMA ने ब्रह्ममुंबई नगर निगम (BMC), डिप्टी सॉल्ट कमिश्नर और वन विभाग की मैंग्रोव सेल को शिकायतों की गहन जांच करने और परियोजना के पर्यावरणीय जोखिमों का विस्तृत अध्ययन प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। इन एजेंसियों को शिकायतकर्ताओं को सीधा जवाब देने तथा अपनी रिपोर्ट MCZMA को उपलब्ध कराने का भी आदेश दिया गया है।
हाल ही में मुलुंड के निवासी इस प्रस्तावित विकास के खिलाफ प्रदर्शन कर चुके हैं। उनका तर्क है कि सॉल्ट पैन का पारिस्थितिकी तंत्र पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने और शहरी बाढ़ को रोकने में अहम भूमिका निभाता है। उन्होंने चेतावनी दी है कि इस क्षेत्र में बड़े पैमाने पर निर्माण कार्य प्राकृतिक जल निकासी को प्रभावित कर स्थानीय बुनियादी ढांचे पर दबाव बढ़ाएगा।
विवाद का केंद्र बिंदु धारावी पुनर्वास परियोजना के तहत उन निवासियों के लिए आवास निर्माण प्रस्ताव है जिन्हें धारावी में पुनर्वास का अवसर नहीं मिला। पर्यावरणीय स्वीकृति के दस्तावेजों के अनुसार, करीब 58 एकड़ सॉल्ट पैन भूमि पर लगभग 26,380 आवास इकाइयां बनाने का प्रस्ताव है, जिनमें 40 से 50 मंजिला कई टावर्स शामिल होंगे।
पर्यावरण कार्यकर्ता और स्थानीय निवासी यह तर्क देते हैं कि सॉल्ट पैन खाली भूमि नहीं बल्कि महत्वपूर्ण दलदली इलाक़े हैं जो भारी मानसून के दौरान अतिरिक्त वर्षा का संग्रह करते हैं। उनका कहना है कि इन निचली भूमि को भरने और विकसित करने से आस-पास के इलाक़ों में बाढ़ का खतरा बढ़ सकता है। मानसून आने से पहले ही वहां पानी भरने और पक्षियों की गतिविधि देखी गई है, जिससे स्वतंत्र पर्यावरणीय समीक्षा की मांग मजबूत हुई है।
पर्यावरणीय चिंताओं के अलावा, निवासी इस परियोजना से मूलुंड की सड़कों, जल आपूर्ति और अन्य नागरिक सुविधाओं पर दबाव बढ़ने की आशंका जता रहे हैं। स्थानीय समूहों में विरोध बढ़ रहा है, जबकि अधिकारी धारावी पुनर्वास योजना से जुड़े अपने प्रस्तावों को आगे बढ़ा रहे हैं।
MCZMA का हस्तक्षेप इस परियोजना के पर्यावरणीय प्रभावों की गंभीर समीक्षा सुनिश्चित करेगा और आगे की स्वीकृतियों को अधिमान्य बनाकर निर्णय लेने में सावधानी बढ़ाएगा।