जेपी की परियोजनाओं में फंड डायवर्जन समेत अन्य अनियमितताओं की प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की जांच जारी है। पिछले सप्ताह निदेशालय ने नोएडा से दो बिल्डरों समेत 6 लोगों को बुलाकर इस प्रकरण में पूछताछ की है। पूछताछ में बुलाए गए बिल्डरों में वह शामिल हैं जिन्होंने जेपी की परियोजनाओं में बड़े प्लॉट लिए हैं। सूत्रों के मुताबिक निदेशालय मामले की जांच में कुछ और अहम सुबूत मिले हैं।
ऐसे में जांच का दायरा और आगे बढ़ सकता है।इससे पहले भी प्रवर्तन निदेशालय कई फ्लैट खरीदारों को बुलाकर लगाए गए आरोपों से जुड़े सबूत जुटा चुका है। निदेशायल ने इसी 9 जून को करीब 100 करोड़ रुपये की संपत्ति अटैच की थी। ईडी ने यह जांच मई 2025 में शुरू कर दी थी। 23 मई 2025 को सेक्टर-128 स्थित जेपी के कॉरपोरेट व मार्केटिंग के ऑफिस समेत 15 ठिकानों पर छापा मारा गया था। जिसके बाद नवंबर में जेपी समूह के पूर्व कार्यकारी अध्यक्ष व प्रबंध निदेशक मनोज गौड़ की गिरफ्तारी हुई।ईडी की यह जांच घर खरीदारों से विभिन्न परियोजनाओं में जमा करवाई गई करीब 32825 करोड़ रुपये से जुड़ी है। जांच में यह सामने आया है कि खरीदारों से जुटाई गई धनराशि का बड़ा हिस्सा आवासीय परियोजनाओं में नहीं लगाकर दूसरी जगह ट्रांसफर कर दी गई।
इससे कई आवासीय परियोजनाएं अधूरी पड़ी रहीं। अकेले जेपी विशटाउन में शामिल 16 परियोजनाओं में 150 से अधिक टावर हैं। जिनमें 20 हजार निवेशक जुड़े हैं। परियोजनाएं अधूरी होने से हज़ारों फ्लैट खरीदार, निवेशक भटक रहे हैं। जेआईएल का टेकओवर करने वाला सुरक्षा समूह भी 235 करोड़ रुपये फंड डायवर्जन के आरोपों से घिरा है। ईडी ने यह प्राथमिकी आर्थिक अपराध शाखा दिल्ली में दर्ज कराई है।

