कांग्रेस का आरोप: अमित शाह लोकसभा में दो-तिहाई बहुमत के लिए पार्टियों को तोड़ रहे हैं
कांग्रेस ने बुधवार को आरोप लगाया कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह तृणमूल कांग्रेस और शिव सेना के अंदर फूट डालकर लोकसभा में दो-तिहाई बहुमत हासिल करने का प्रयास कर रहे हैं। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने इस रणनीति को संविधान संशोधन करके आरक्षण समाप्त करने के उद्देश्य से जोड़ा।
तृणमूल कांग्रेस और उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिव सेना में हाल के हफ्तों में दलबदल और आंतरिक विद्रोह देखने को मिले हैं। 14 जून को तृणमूल की नेता काकोली घोष दस्तिदार ने बताया कि पार्टी के 20 सांसद त्रिपुरा की नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी में विलय कर भाजपा-नेतृत्व वाले एनडीए का समर्थन करेंगे।
सोमवार को शिव सेना के छह सांसद महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले प्रतिद्वंद्वी गुट में शामिल हो गए, जो राष्ट्रीय लोकतांत्रिक गठबंधन का हिस्सा है। इससे शिंदे गुट की लोकसभा में संख्या बढ़कर 13 हो गई।
जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि अमित शाह संसद में अप्रैल में चुनावी क्षेत्र निर्धारण के लिए प्रस्तावित संविधान संशोधन विधेयक के पैरवी में हार का बदला ले रहे हैं। उल्लेखनीय है कि 2026 के संविधान 131वें संशोधन विधेयक को पारित करने के लिए संसद में दो-तिहाई बहुमत आवश्यक था, जो सरकार को विभिन्न क्षेत्रों के परिसीमन को पुनः निर्धारित करने का अधिकार देता।
कांग्रेस का यह आरोप उस समय आया है जब भाजपा सक्रिय रूप से विपक्षी पार्टियों में मतभेद बढ़ाकर अपनी स्थिति मजबूत करने में जुटी है, जिससे संसदीय बहुमत के महत्व पर राजनीतिक उथलपुथल बढ़ रही है। इस बात से भी विशेष तौर पर ध्यान जाता है कि मौजूदा सत्ताधारी दल सरकारी नीतियों जैसे आरक्षण को लेकर संवैधानिक बदलाव करने का प्रयास कर रहा है।
राजनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसे कदम न केवल लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं, बल्कि सामाजिक संतुलन और अस्मिताओं के बीच व्यापक बहस को भी जन्म दे सकते हैं। इसलिए, इस मुद्दे पर सभी पार्टियों की प्रतिक्रिया और आने वाले दिनों में संसद में इसकी चर्चा पर जनता की नजर बनी रहेगी।