एल नीनो की तीव्रता बढ़ने की संभावना: भारत में धीमे मानसून के बीच जलवायु जोखिम
वैश्विक मौसम विज्ञान एजेंसियों ने पुष्टि की है कि एल नीनो घटना सक्रिय हो गई है। भारत में, भारतीय मौसम विभाग के जून बुलेटिन के अनुसार, भूमध्यरेखा वाली प्रशांत महासागर में एल नीनो की स्थिति मानसून की धीमी प्रगति के साथ और तीव्र होने की संभावना है। विशेषज्ञ इस विकास को गंभीर जलवायु जोखिम के रूप में देखते हैं और समय पर योजना एवं तैयारी की सलाह देते हैं।
विश्व मौसम संगठन, अमेरिकी राष्ट्रीय महासागरीय और वायुमंडलीय प्रशासन, कोपर्निकस क्लाइमेट चेंज सर्विस तथा भारतीय मौसम विभाग एकमत हैं कि आगामी महीनों में एल नीनो की घटना मध्यम से तीव्रतर हो सकती है।
विश्व मौसम संगठन की तकनीकी समन्वयक बारबरा टापिया कॉर्टेस के अनुसार, “जून से अगस्त 2026 के बीच एल नीनो विकसित होने की संभावना 80% के आसपास है। अगस्त से नवंबर तक यह स्थिति बने रहने की संभावना लगभग 90% या उससे अधिक है।”
हालिया अपडेटों ने सूखे, गर्मी की लहरों और मानसून में व्यवधान जैसे जोखिमों के मद्देनजर वैश्विक सतर्कता बढ़ाई है। हालांकि, जबकि एल नीनो की पुष्टि हो चुकी है और इसके आगे तेज़ होने की संभावना बनी हुई है, इसके प्रभावों की तीव्रता और विस्तार के संबंध में अभी भी अनिश्चितता बनी हुई है।
कॉर्टेस बताती हैं, “इसके प्रभाव इस घटना की तीव्रता, अवधि, समय और अन्य जलवायु कारकों के साथ परस्पर क्रिया पर निर्भर करते हैं।”
भारत के लिए, जहां कृषि, जल संसाधन और शहरी जल आपूर्ति इन मौसमी बदलावों से सीधे प्रभावित होती है, आवश्यक है कि उपयुक्त रणनीति अपनाई जाए ताकि संभावित समस्याओं से निपटा जा सके। विशेषज्ञों का मानना है कि तैयारियों और सतर्कता से इन जलवायु जोखिमों के प्रभाव को कम किया जा सकता है।