दिल्ली हाईकोर्ट ने नाबालिग बेटे प्रतीक शॉ को अपने पिता को लिवर दान करने की अनुमति दे दी है। मां वंदना शॉ के माध्यम से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति मिनी पुष्करणा और न्यायमूर्ति विनोद कुमार की पीठ ने कहा कि बेटे के प्यार और फर्ज को देखते हुए लिवर ट्रांसप्लांट की अनुमति देना ही न्यायसंगत है।अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि अनुमति नहीं दी गई तो पिता की जान जा सकती है। पीठ ने वसंत कुंज स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ लिवर एंड बिलियरी साइंसेज (आईएलबीएस) को निर्देश दिया कि वह सभी कानूनी और क्लिनिकल प्रोटोकॉल का पालन करते हुए याचिकाकर्ता का लिवर ट्रांसप्लांट कराए। अस्पताल ने कोर्ट को बताया कि अब जल्द ही ऑपरेशन की तारीख तय कर दी जाएगी। अदालत ने दिल्ली सरकार के हलफनामे को रिकॉर्ड पर लिया।
सरकार ने बताया कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की अनुमति के बाद उपराज्यपाल और संबंधित अधिकारियों ने लिवर ट्रांसप्लांट को मंजूरी दे दी है। कोर्ट ने यह भी दर्ज किया कि प्रतीक शॉ ही अपने पिता के लिए एकमात्र उपयुक्त डोनर है और वह बिना किसी दबाव के पिता की जान बचाने के लिए लिवर का हिस्सा दान करने को तैयार है।

