दिल्ली में पश्चिम एशियाई धूल भरी आंधी से वायु गुणवत्ता में भारी गिरावट
हाल ही में पश्चिम एशिया से आई धूल भरी आंधी ने दिल्ली की मानसून वायु गुणवत्ता को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। इसके कारण राजधानी में हवा की गुणवत्ता सूचकांक (AQI) ‘‘बहुत खराब’’ स्तर के निकट पहुंच गया है, जिससे आम नागरिकों की सांस लेने की क्षमता पर प्रतिकूल असर पड़ा है।
दिल्ली और उसके आसपास के क्षेत्रों में मानसून के दौरान आमतौर पर हवा का प्रदूषण कम रहता है, क्योंकि बारिश के कारण वायु में मौजूद प्रदूषकों की मात्रा घट जाती है। लेकिन इस बार पश्चिम एशियाई धूल भरी आंधी के कारण यह पारंपरिक धारणा चुनौतीपूर्ण साबित हुई है।
विद्युत स्थलों और पर्यावरण विभाग के ताजा आंकड़ों के अनुसार, धूल भरी आंधी की वजह से पीएम2.5 और पीएम10 कणों का स्तर सामान्य से कई गुना अधिक बढ़ गया है। इन सूक्ष्म कणों में विषैले पदार्थ होते हैं जो सांस लेने के लिए हानिकारक होते हैं और श्वसन संबंधी बीमारियों को बढ़ावा देते हैं।
मौसम विभाग के विशेषज्ञों का कहना है कि पश्चिम एशियाई क्षेत्र के रेगिस्तानी इलाकों के तूफानी हालात ने धूल कणों को लेकर हवाओं को भारत की ओर प्रवाहित किया है। इस कारण दिल्ली समेत उत्तरी भारत के कई हिस्सों में हवा की शुद्धता प्रभावित हुई है।
स्थानीय प्रशासन ने प्रदूषण नियंत्रण के उपायों को और प्रभावी बनाने की दिशा में कदम उठाए हैं। जैसे औद्योगिक गतिविधियों को सीमित करना, वाहनों की संख्या नियंत्रित करना और सार्वजनिक जागरूकता अभियान चलाना। इसके साथ ही स्वास्थ्य विभाग ने नागरिकों को विशेष तौर पर बुजुर्गों, बच्चों और श्वसन रोग से ग्रस्त लोगों को बाहर निकलने और शारीरिक गतिविधि करने से बचने की सलाह दी है।
विशेषज्ञों का निष्कर्ष है कि जलवायु परिवर्तन और बढ़ती औद्योगिकीकरण के कारण ऐसी प्राकृतिक घटनाओं का प्रभाव भविष्य में और अधिक गहरा होगा। इसलिए स्वच्छ वायु की रक्षा के लिए दीर्घकालिक और सामूहिक प्रयास आवश्यक हैं।