भूख हड़ताल का प्रभाव बढ़ता जा रहा है, वांगचुक सहायता लेने से परहेज कर रहे हैं
दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल से जारी ताजा रिपोर्ट के अनुसार, वांगचुक की भूख हड़ताल लगातार चौथे दिन भी जारी है, जिससे उनका स्वास्थ्य गंभीर रूप से प्रभावित हो रहा है। हालांकि उन्होंने चिकित्सा सहायता लेने से साफ इनकार किया है।
वांगचुक, जो कुछ समय से अपनी मांगों को लेकर भूख हड़ताल पर हैं, की स्थिति को लेकर चिकित्सकों और अस्पताल प्रशासन के बीच चिंता बढ़ती जा रही है। सफदरजंग अस्पताल की टीम लगातार उनकी स्थिति का मूल्यांकन कर रही है और आवश्यकतानुसार उपचार प्रदान करने के लिए तैयार है।
अस्पताल प्रशासन ने कहा है कि वांगचुक की सहमति के बिना कोई भी चिकित्सा हस्तक्षेप नहीं किया जाएगा, लेकिन उनकी स्वास्थ्य स्थिति के मद्देनज़र निगरानी कड़ी रखी जा रही है। रिपोर्ट में यह उल्लेख किया गया है कि भूख हड़ताल के कारण उनकी शारीरिक ताकत कमजोर हुई है और धीरे-धीरे गंभीर स्वास्थ्य जोखिम उत्पन्न हो सकते हैं।
पृष्ठभूमि की बात करें तो वांगचुक ने अपने मुद्दे को लेकर प्रशासन से कई बार संवाद स्थापित करने का प्रयास किया था, लेकिन परिणामस्वरूप उन्हें भूख हड़ताल जैसे कदम उठाने पड़े। उनका कहना है कि उनकी मांगों की तत्काल पूर्ति आवश्यक है, अन्यथा उनकी जिंदगियां खतरे में पड़ सकती हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, भूख हड़ताल के दौरान चिकित्सीय सलाह का पालन करना आवश्यक होता है ताकि किसी भी स्वास्थ्य जटिलता से बचा जा सके। प्रशासन ने भी उम्मीद जताई है कि वांगचुक जल्द ही चिकित्सा सहायता ग्रहण करेंगे और संवाद के माध्यम से समाधान निकाला जाएगा।
इस बीच, वांगचुक के समर्थक और सामाजिक समूह उनके समर्थन में जदोजहद कर रहे हैं, और उनकी मंशा के प्रति जागरूकता बढ़ाने का प्रयास कर रहे हैं। सरकार और संबंधित विभागों से अनुरोध किया जा रहा है कि वे इस मसले को संवेदनशीलता के साथ देखें और त्वरित कार्रवाई करें।