दिल्ली सरकार जल्द ही एक नया लैंड रिकॉर्ड बिल लाने की तैयारी में है। इस बिल का उद्देश्य राष्ट्रीय राजधानी में भूमि के स्वामित्व और प्रबंधन को सुव्यवस्थित करना है। इसके तहत शहर की हर भूमि का एक व्यापक और डिजिटल रिकॉर्ड सरकार के पास उपलब्ध होगा। यह कदम भूमि संबंधी विवादों को कम करने और पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।लैंड रिकॉर्ड बिल ला रही दिल्ली सरकार सरकार सभी संबंधित एजेंसियों से भूमि संबंधी डेटा एकत्र करेगी। इसमें विभिन्न सरकारी विभागों और स्थानीय निकायों के रिकॉर्ड शामिल होंगे। भूमि का सर्वे और मैपिंग का कार्य जल्द ही शुरू किया जाएगा। इस प्रक्रिया में आधुनिक तकनीक जैसे ड्रोन और भौगोलिक सूचना प्रणाली (जीआईएस) का उपयोग किया जा सकता है। सीएम रेखा बोलीं- जल्द ही कैबिनेट में लाया जाएगा बिलमुख्यमंत्री ने बताया कि इस महत्वपूर्ण फैसले को जल्द ही कैबिनेट में लाया जाएगा।
इसके लिए एक विशेष विधानसभा सत्र भी बुलाया जाएगा ताकि बिल को पारित किया जा सके। तीन सांसद कमलजीत सेहरावत, रामवीर सिंह बिधूड़ी, योगेंद्र चंदोलिया, चा विधायक करतार सिंह, नीलम पहलवान, गजेंद्र द्राल, संदीप सेहरावत मौजूद रहे। सरकार 30 गांवों के निवासियों को स्वामित्व कार्ड देने की योजना बना रही है। यह एक पायलट परियोजना के रूप में शुरू हो सकता है। हर व्यक्ति के पास, चाहे वह गांव में रहता हो या शहर में, अपना प्रॉपर्टी कार्ड होगा। यह कार्ड भूमि के मालिकाना हक का एक वैध प्रमाण होगा।सर्वे और मैपिंग की प्रक्रियासरकार ने भूमि के सर्वे और मैपिंग के लिए विस्तृत योजना तैयार की है।
इस कार्य में नवीनतम तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। ड्रोन आधारित सर्वे से भूमि की सटीक सीमाएं निर्धारित की जाएंगी। जीआईएस मैपिंग के जरिये सभी भूमि पार्सल का डिजिटल नक्शा तैयार होगा। यह प्रक्रिया भूमि के हर टुकड़े की पहचान सुनिश्चित करेगी। विभिन्न सरकारी विभागों के मौजूदा रिकॉर्ड को भी इसमें एकीकृत किया जाएगा। इस व्यापक सर्वे से भूमि संबंधी जानकारी की सटीकता बढ़ेगी। यह भूमि रिकॉर्ड को अधिक विश्वसनीय बनाएगा।

