बिहार के बैंकिपुर में प्रशांत किशोर की उपचुनाव जीत: एक राजनीतिक भूचाल
बिहार के बैंकिपुर विधानसभा क्षेत्र में सोमवार को हुए उपचुनाव में चुनाव रणनीतिकार से राजनीतिज्ञ बने प्रशांत किशोर की जीत ने राजनीतिक गलियारों में भूचाल मचा दिया। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने पिछले तीन दशकों से इस सीट पर कब्जा बनाए रखा था, लेकिन किशोर ने यहां हिंदुत्व पार्टी के उम्मीदवार को 19,000 से अधिक मतों से परास्त किया।
लगभग नौ महीने पहले विधानसभा चुनावों में, किशोर की जन सूरत पार्टी का उम्मीदवार बैंकिपुर में तीसरे स्थान पर रहा था, जबकि नितिन नबीन ने यह सीट लगातार पांचवीं बार जीती थी। उपचुनाव की स्थिति इसलिए बनी क्योंकि नितिन नबीन, जो अब भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं, राज्यसभा के लिए चुने गए।
उपचुनाव घोषित होते ही किशोर, जिनके अपने समर्थकों द्वारा विधानसभा चुनाव में खुद हिस्सा न लेने के निर्णय की आलोचना की गई थी, सबसे पहले मैदान में आये। उन्होंने अपनी चुनावी सभा में भाजपा पर निशाना साधा, पार्टी के मुख्यमंत्री चयन पर सवाल उठाए और बिहार के मतदाताओं द्वारा दिए गए जनादेश की कथित तौर पर भाजपा द्वारा अनदेखी का आरोप लगाया।
उन्होंने बैंकिपुर के इस चुनाव को भाजपा के अप्रैल में मतदाता द्वारा चुने गए नितिश कुमार को हटाकर पार्टी के सदस्य सम्राट चौधरी को मुख्यमंत्री बनाने के फैसले के खिलाफ एक “जनमत संग्रह” के रूप में प्रस्तुत किया। यह कदम भाजपा और जनता दल (यूनाइटेड) के लंबे समय से चले आ रहे गठबंधन को चुनौती देने वाला साबित हुआ।
सोमवार के परिणाम से स्पष्ट होता है कि किशोर की यह निर्णायक जीत राजनीतिक परिदृश्य में उनकी वृद्धि को दर्शाती है और आगामी राजनीति में उनकी भूमिका को और अधिक मजबूत करेगी। भाजपा की तीन दशकों से चली आ रही सत्ता की गढ़ में इस प्रकार की अप्रत्याशित हार उसे न केवल झकझोरती है, बल्कि विरोधी दलों के लिए भी एक नई उम्मीद जगाती है।
इस जीत ने बिहार की राजनीति में आगामी परिवर्तनों की संभावना को और अधिक स्पष्ट कर दिया है और प्रशांत किशोर की रणनीतिक क्षमता तथा जन भावना को समझने की दृष्टि से महत्वपूर्ण बना दिया है।