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दिल्ली: बंद फैक्ट्रियों के निरीक्षण पर एनजीटी सख्त

राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने दिल्ली में कथित अवैध और प्रदूषण फैलाने वाली फैक्ट्रियों के निरीक्षण को लेकर दिल्ली पुलिस आयुक्त से जवाब मांगा है। एनजीटी अध्यक्ष प्रकाश श्रीवास्तव और विशेष सदस्य डॉ. अफरोज अहमद की पीठ ने पुलिस आयुक्त को हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। साथ ही, सवाल किया कि यदि किसी फैक्ट्री या परिसर पर बाहर से ताला लगा हो और अंदर अवैध गतिविधियां चलने की आशंका हो, तो ऐसे स्थान का निरीक्षण किस प्रक्रिया के तहत किया जाएगा। मामले की अगली सुनवाई 14 अक्तूबर 2026 को होगी। यह निर्देश वरुण गुलाटी बनाम केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड एवं अन्य मामले की सुनवाई के दौरान दिए।सुनवाई में जाफराबाद थाना प्रभारी (एसएचओ) की ओर से दायर हलफनामे में बताया गया कि 31 अक्तूबर 2025 को एमसीडी, डीपीसीसी, बीएसईएस और दिल्ली पुलिस की संयुक्त टीम ने घोंडा और अरविंद नगर इलाके में तीन स्थानों का निरीक्षण करने की कोशिश की थी, लेकिन सभी जगहों पर ताले लगे होने के कारण जांच नहीं हो सकी। हलफनामे में यह भी कहा गया कि कई बार फैक्ट्री मालिक जानबूझकर परिसर बंद कर देते हैं और निरीक्षण टीम को अंदर नहीं जाने देते।

कई मामलों में लोग विरोध करते हैं, भीड़ इकट्ठा कर लेते हैं और अधिकारियों के काम में बाधा डालते हैं। एसएचओ ने बताया कि कुछ मामलों में ताला तोड़कर अंदर जाने पर विचार किया गया, लेकिन स्पष्ट कानूनी अनुमति या दिशा-निर्देश नहीं होने के कारण ऐसा नहीं किया गया।सुनवाई के दौरान पीठ ने दिल्ली पुलिस के वकील से पूछा कि ऐसी स्थिति में ताला तोड़कर निरीक्षण करने की अनुमति किस अधिकारी से ली जाती है। वकील इसका स्पष्ट जवाब नहीं दे सके। इसके बाद अदालत ने दिल्ली पुलिस आयुक्त को हलफनामा दाखिल कर यह बताने का निर्देश दिया कि बाहर से बंद परिसरों में, जहां अवैध गतिविधियां होने का संदेह हो, वहां निरीक्षण और कार्रवाई की कानूनी प्रक्रिया क्या है।

एसएचओ ने अपने हलफनामे में यह भी कहा कि दिल्ली पुलिस ने संयुक्त निरीक्षण में पूरा सहयोग किया था। पुलिस अधिकारियों द्वारा निरीक्षण रिपोर्ट पर हस्ताक्षर करने से इन्कार करने का आरोप गलत है। साथ ही, बताया गया कि दिसंबर 2025 में बीएसईएस की टीम के निरीक्षण के दौरान सरकारी कार्य में बाधा डालने के आरोप में एक एफआईआर भी दर्ज की गई थी, जिसकी जांच जारी है।

By Ankshree

Ankit Srivastav (Editor in Chief )