दिल्ली में बढ़ती आबादी के बीच पानी की कमी में किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना से कुछ हद तक राहत मिल सकती है। छह राज्यों के बीच हुए समझौते के तहत दिल्ली को परियोजना से 109.9 मिलियन क्यूबिक मीटर (एमसीएम) यानी 30 करोड़ लीटर अतिरिक्त पानी मिलेगा। यानी लगभग 80 एमजीडी पानी प्रतिदिन प्राप्त होगा। इस हिसाब से मौजूदा 1250 एमजीडी मांग और 1000 एमजीडी आपूर्ति के बीच 250 एमजीडी की कमी में किशाऊ करीब 80 एमजीडी की भरपाई करेगा। लिहाजा यह परियोजना दिल्ली का करीब 32 प्रतिशत जलसंकट दूर करेगी।
इससे पानी की आपूर्ति 1000 से बढ़कर करीब 1080 एमजीडी हो जाएगी और मांग-आपूर्ति का अंतर 250 से घटकर लगभग 170 एमजीडी रह जाएगा।दिल्ली के आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के मुताबिक, 2.5 करोड़ की अनुमानित आबादी के लिए 50 गैलन प्रति व्यक्ति प्रतिदिन के मानक पर राजधानी में पेयजल मांग करीब 1250 एमजीडी है। इसके मुकाबले दिल्ली की जल उत्पादन क्षमता करीब 1000 एमजीडी के आसपास है। यानी पानी की मांग व उत्पादन में करीब 250 एमजीडी का अंतर है। गर्मी के दिनों में स्थिति और गंभीर हो जाती है। मई 2026 में कच्चे पानी की कमी के कारण दिल्ली की आपूर्ति करीब 900-950 एमजीडी तक गिर गई थी, जबकि मांग करीब 1250 एमजीडी थी। ऐसे समय में कमी 300 एमजीडी या उससे अधिक तक पहुंच जाती है।केंद्र सरकार की पहल पर हुए इस समझौते के तहत दिल्ली को पानी तत्काल मिलना शुरू नहीं होगा।
इस समझौते ने लंबे समय से अटकी परियोजना के लिए अंतरराज्यीय सहमति का रास्ता खोला है। जून में छह राज्यों की सहमति के बाद परियोजना को केंद्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी के लिए आगे बढ़ाने की बात कही गई थी।प्रोजेक्ट पूरा होने में अभी वक्तकिशाऊ परियोजना के पूरा होने में वक्त लगेगा। अभी यह निर्माण के शुरुआती चरण से पहले की मंजूरी प्रक्रिया में है। इस प्रोजेक्ट के पूरा होने का अनुमान 2033 तक बताया जा रहा है।
ऐसे में अभी करीब सात साल दिल्ली को इस प्रोजेक्ट से पानी मिलने में लग सकते हैं।90 फीसदी खर्च करेगी केंद्र सरकारपरियोजना के वित्तीय ढांचे में दिल्ली के लिए सबसे बड़ी राहत यह है कि जल घटक की 90 प्रतिशत लागत केंद्र सरकार वहन करेगी और शेष 10 प्रतिशत छह भागीदार राज्यों को उठाना होगा। किशाऊ की पिछली अनुमानित लागत करीब 11,550 करोड़ रुपये थी, जिसमें जल घटक की लागत लगभग 10,014 करोड़ रुपये और बिजली घटक करीब 1,536 करोड़ रुपये था। यह मार्च 2018 के मूल्य स्तर पर आधारित आंकड़ा है और अब परियोजना की लागत बढ़ चुकी है।
दिल्ली किशाऊ परियोजना के लिए 8.1 करोड़ रुपये की बीज राशि जमा कर चुकी है।123 क्यूसेक प्रवाह के बराबर है 109.9 एमसीएम पानीकिशाऊ से मिलने वाला 109.9 एमसीएम पानी लगातार औसत प्रवाह के हिसाब से करीब 123 क्यूसेक के बराबर है। यानी मात्रा की तुलना में यह सीधे यमुना नदी से मिलने वाले 209 क्यूसेक का करीब 59 फीसदी है। हालांकि किशाऊ के पानी को मौजूदा यमुना प्रवाह में सीधे जोड़कर नहीं देखा जा सकता।

