• Wed. Oct 7th, 2026

India Core News | Read Latest Trending News..

आपका इंडिया आपकी न्यूज़

जंतर-मंतर बवाल की अब होगी विस्तृत जांच, पेलेट गन और महिलाओं से हिंसा समेत इन मामलों की होगी पड़ताल

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने जुलाई में जंतर-मंतर पर हुए छात्रों के विरोध प्रदर्शन की जांच के लिए गठित पांच सदस्यीय उच्चस्तरीय जांच समिति (HPEC) को जांच शुरू करने का निर्देश दिया है। समिति को पेलेट गन के इस्तेमाल, महिला प्रदर्शनकारियों के साथ हुई हिंसा, पुलिसकर्मियों के घायल होने और संपत्ति को हुए नुकसान की जांच करने को कहा गया है। इसके अलावा कोर्ट ने 14 साल की एक प्रदर्शनकारी लड़की को सुरक्षा उपलब्ध कराने का भी आदेश दिया है।

यह मामला 20 जुलाई को संसद तक निकाले गए उस मार्च से संबंधित है, जिसका नेतृत्व कॉकरोच जनता पार्टी ने किया था। यह प्रदर्शन NEET पेपर लीक के विरोध में शुरू हुआ था और इसके बाद दोबारा परीक्षा करानी पड़ी थी। प्रदर्शनकारियों ने तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग भी की थी। उन्होंने 25 जुलाई को इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद सरकार ने नंदन नीलेकणी की अध्यक्षता में परीक्षा सुधार समिति का गठन किया था।

10 सितंबर की सुनवाई में कोर्ट ने दिए थे निर्देश

10 सितंबर को हुई सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की पीठ ने HPEC को गवाहों की पहचान गोपनीय रखने और सबूत जमा करने के लिए एक अलग ऑनलाइन पोर्टल तैयार करने का निर्देश दिया था।

कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रदर्शन से जुड़े संवैधानिक मुद्दों, जिसमें फेस रिकग्निशन तकनीक के इस्तेमाल का सवाल भी शामिल है, पर फैसला सुप्रीम कोर्ट खुद करेगा। वहीं, समिति के पुनर्गठन की मांग को लेकर दायर याचिकाओं को कोर्ट ने खारिज कर दिया था।

14 साल की लड़की और परिवार को सुरक्षा

14 साल की लड़की और उसके परिवार को संभावित खतरे को देखते हुए दिल्ली पुलिस को जल्द जांच करने और सुरक्षा देने का निर्देश दिया गया है। यह मामला दक्षिणपंथी इन्फ्लुएंसर स्वतंत्र भारद्वाज से जुड़ा है। उन्हें लड़की के पिता पर हमला करने का दावा किए जाने के बाद हिरासत में लिया गया था।

लड़की की ओर से धमकी देने और छेड़छाड़ की गई तस्वीरें फैलाने के आरोप लगाए गए थे। इस मामले में स्वतंत्र भारद्वाज पर एससी-एसटी एक्ट और पॉक्सो के तहत भी केस दर्ज है।

डॉ. मोनिका गुसाईं और सी. सोलोमन बने न्याय मित्र

सुप्रीम कोर्ट ने डॉ. मोनिका गुसाईं और सी. सोलोमन को न्याय मित्र नियुक्त किया है। वहीं, पूर्व जज न्यायमूर्ति आर. सुभाष रेड्डी की अध्यक्षता वाली HPEC अपनी सिफारिशें दे सकती है, लेकिन उसे एफआईआर दर्ज कराने का अधिकार नहीं है।

इस मामले में अगली सुनवाई 9 अक्टूबर को होगी।

By admin

Journalist & Entertainer Ankit Srivastav ( Ankshree)