ग्रेटर नोएडा: ग्रेटर नोएडा में डीएससी (दादरी-सूरजपुर-छलेरा) रोड पर बनने वाले 4 किलोमीटर लंबे एलिवेटेड रोड की योजना में बदलाव किया गया है। तिलपता चौक से कंटेनर डिपो तक बनने वाले इस रोड की फिजिबिलिटी स्टडी और विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) अब उत्तर प्रदेश सेतु निगम की जगह IIT रुड़की तैयार करेगा।
प्राधिकरण ने सेतु निगम से यह जिम्मेदारी वापस ले ली है। साथ ही, पहले दिए गए 35 लाख रुपये भी वापस मांगे हैं।
सेतु निगम से क्यों वापस लिया गया काम?
शुरुआत में प्राधिकरण ने एलिवेटेड रोड की डीपीआर तैयार करने का काम उत्तर प्रदेश सेतु निगम को सौंपा था। इसके लिए निगम को 35 लाख रुपये का भुगतान भी किया गया था।
लेकिन सेतु निगम डीपीआर तैयार करने के साथ-साथ एलिवेटेड रोड के निर्माण का काम भी अपने पास रखना चाहता था। प्राधिकरण इस प्रस्ताव पर सहमत नहीं हुआ। इसके बाद दोनों के बीच सहमति नहीं बन पाई और प्राधिकरण ने सेतु निगम से यह काम वापस लेने का फैसला किया।
अब प्राधिकरण ने सेतु निगम से 35 लाख रुपये लौटाने को कहा है। वहीं, डीपीआर और फिजिबिलिटी रिपोर्ट तैयार करने की जिम्मेदारी IIT रुड़की को देने का निर्णय लिया गया है। प्राधिकरण के अधिकारियों का मानना है कि IIT रुड़की की रिपोर्ट तकनीकी रूप से बेहतर और पारदर्शी होगी।
रोजाना डेढ़ लाख से ज्यादा वाहनों की आवाजाही
तिलपता चौक से दादरी स्थित कंटेनर डिपो तक और ग्रेटर नोएडा वेस्ट से तिलपता चौक होते हुए दादरी की तरफ रोजाना डेढ़ लाख से ज्यादा वाहन गुजरते हैं। इस इलाके में कई फैक्ट्रियां भी मौजूद हैं।
कंटेनर ट्रकों और स्थानीय वाहनों के एक ही सड़क पर चलने से व्यस्त समय में रोजाना लंबा जाम लग जाता है। इस मार्ग से दादरी रेलवे ओवरब्रिज और रूपवास बाईपास भी जुड़े हुए हैं, जिससे यहां यातायात का दबाव बना रहता है।
एलिवेटेड रोड बनने से क्या होगा फायदा?
प्राधिकरण की योजना के मुताबिक, एलिवेटेड रोड बनने के बाद तिलपता से कंटेनर डिपो और आगे दादरी की ओर जाने वाले वाहन ऊपर से आसानी से गुजर सकेंगे। वहीं, नीचे की सड़क पर स्थानीय वाहनों की आवाजाही सुचारू रहेगी।
इससे जाम की समस्या कम करने में मदद मिलेगी। साथ ही, औद्योगिक सामान की ढुलाई तेज होगी और कंटेनर ट्रकों को आने-जाने में आसानी होगी।
IIT रुड़की तैयार करेगा रिपोर्ट
एलिवेटेड रोड की डीपीआर और फिजिबिलिटी रिपोर्ट को लेकर सेतु निगम के साथ सहमति नहीं बन पाई थी। इसी वजह से प्राधिकरण ने अब यह काम IIT रुड़की से कराने का फैसला किया है। सेतु निगम को पहले किए गए भुगतान की रकम भी वापस मांगी गई है।
ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के जीएम प्रोजेक्ट एके सिंह के मुताबिक, सेतु निगम के साथ डीपीआर और फिजिबिलिटी रिपोर्ट को लेकर गतिरोध पैदा हो गया था। इसके बाद प्राधिकरण ने रिपोर्ट तैयार कराने की जिम्मेदारी IIT रुड़की को देने का निर्णय लिया।

