ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा को शनिवार सुबह पुलिस हिरासत से छोड़ दिया गया। उन्हें शुक्रवार शाम दिल्ली में ‘लहरा दो तिरंगा मार्च’ के दौरान हिरासत में लिया गया था। बाहर आने के बाद नेहा ने अपने साथ हुए व्यवहार के बारे में जानकारी दी और अन्य प्रदर्शनकारियों को भी रिहा करने की मांग की।
नेहा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि उन्हें रिहा कर दिया गया है, लेकिन अभिजीत दीपके समेत हिरासत में लिए गए बाकी लोगों को भी जल्द छोड़ा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र और संविधान के लिए आवाज उठाना कोई अपराध नहीं है।
नेहा के समर्थक देर रात तक पुलिस से उनकी लोकेशन पूछते रहे। बाद में जानकारी मिली कि उन्हें आरके पुरम पुलिस स्टेशन में रखा गया था। नेहा के एक्स अकाउंट पर किए गए पोस्ट के मुताबिक, वह करीब पांच घंटे तक थाने में रहीं।
समाचार एजेंसी एएनआई की ओर से साझा किए गए वीडियो में नेहा कुछ लोगों के साथ बाहर आती दिखाई देती हैं। जब उनसे अपना अनुभव बताने के लिए कहा गया, तो उन्होंने कहा, “क्या बोलूं यार?” और फिर वहां से आगे बढ़ गईं।
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) लिबरेशन के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य ने नेहा की रिहाई पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि कानूनी टीम, समर्थकों, जागरूक नागरिकों और विपक्ष की कोशिशों के बाद पुलिस को उन्हें छोड़ना पड़ा।
दीपांकर ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि इस तरह का व्यवहार लोगों के विरोध को कमजोर करने के बजाय उन्हें और एकजुट कर सकता है।
नेहा बोरा के साथ कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दीपके को भी 16 अक्टूबर की शाम हिरासत में लिया गया था। सीजेपी की लीगल हेड रत्ना सिंह ने सोशल मीडिया पर दावा किया कि अभिजीत को गिरफ्तार कर एसईएम कोर्ट में पेश किया जाना है।
रत्ना सिंह के अनुसार, उस समय तक उन्हें यह जानकारी नहीं मिली थी कि अभिजीत को कहां रखा गया है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि वकीलों को उनसे मिलने की अनुमति नहीं दी जा रही थी।
इससे पहले नेहा के वकील सुपंत सिन्हा ने भी दावा किया था कि नेहा को आरके पुरम थाने में गैरकानूनी तरीके से हिरासत में रखा गया और उन्हें अपने वकील से बात करने में परेशानी हुई।
रिहाई के बाद नेहा ने आरोप लगाया कि आम नागरिकों के साथ ऐसा व्यवहार किया जा रहा है, मानो वे गंभीर अपराधी हों। उन्होंने सवाल उठाया कि प्रदर्शनकारियों को घंटों तक थाने में रखने का कानूनी आधार क्या है।
नेहा के मुताबिक, लोगों को दिन या शाम के समय हिरासत में लेने के बाद पूरी रात थाने में रखा जाता है और फिर अगले दिन छोड़ दिया जाता है। उन्होंने महिलाओं को सूर्यास्त के बाद हिरासत में रखने के मामलों पर भी सवाल उठाए।
उन्होंने दिल्ली में यातायात और रास्ते बंद होने की समस्या का जिक्र करते हुए कहा कि आम लोगों को काम पर जाने में परेशानी होती है। साथ ही, उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग चलाने और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की प्रक्रिया रोकने की मांग भी की।
नेहा ने बताया कि पुलिस ने उनसे नाम, पता और दूसरी जानकारियां मांगीं। उनका दावा है कि लंबे समय तक उन्हें अपनी बात रखने और कानूनी सलाह लेने का मौका नहीं मिला।
उन्होंने कहा कि उनके वकील करीब पांच से छह घंटे तक उनसे संपर्क करने की कोशिश करते रहे। नेहा के अनुसार, फोन पर संपर्क हो पाने के बाद ही वकीलों को उनसे मिलने की अनुमति मिली।
फिलहाल, इस मामले में नेहा और उनके समर्थकों की ओर से पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए गए हैं। हिरासत और गिरफ्तारी से जुड़े अलग-अलग दावों पर संबंधित पक्षों का आधिकारिक पक्ष सामने आना भी जरूरी है।

