इसके बाद महिला वकील की तरफ से सुप्रीम कोर्ट में बताया गया कि यह बहुत ही गंभीर किस्म का मामला है। जिसमें महिला वकील के साथ थाने में पुलिस ने यौन हिंसा की और सबूत मिटाने के लिए सीसीटीवी कैमरे बंद कर दिए गए। पीडि़ता का मोबाइल भी जब्त कर लिया गया और उससे वीडियो डिलीट करवाए गए। महिला वकील को जान से मारने तक की धमकी दी गई। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के दो जजों की पीठ ने केंद्र सरकार, यूपी सरकार व नोएडा पुलिस को नोटिस जारी किया था। वहीं गौतमबुद्घनगर की पुलिस आयुक्त को इस घटना से जुड़े सीसीटीवी फुटेज को सुरक्षित रखने और उसे सीलबंद लिफाफे में सुप्रीम कोर्ट में पेश करने का आदेश दिया था।
सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के बाद नोएडा में पुलिस महकमे में खलबली मच गई थी। इसके बाद एसएचओ को लाइन हाजिर कर दिया गया। अपर पुलिस आयुक्त कानून व्यवस्था राजीव नारायण मिश्र का कहना है कि इस जांच की निष्पक्षता बनी रहे। इस कारण एसएचओ को हटाया गया है। उन्होंने बताया कि इस मामले में पुलिस की जांच चल रही है।

