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गुरुग्राम: विदेशों में फरार अपराधियों की गिरफ्तारी प्रक्रिया पर एक महत्वपूर्ण बैठक

पुलिस आयुक्त कार्यालय में अंतरराष्ट्रीय आपराधिक जांच एवं विदेशों में फरार अपराधियों की गिरफ्तारी प्रक्रिया पर एक महत्वपूर्ण बैठक एवं प्रशिक्षण सत्र आयोजित किया गया। बैठक में सीबीआई की इंटरनेशनल पुलिस कोआर्डिनेशन यूनिट (आईपीसीयू) से आए डीएसपी विपिन कुमार मित्तल ने विदेशी जांच विषय पर विस्तृत और उपयोगी व्याख्यान प्रस्तुत किया। पुलिस आयुक्त विकास अरोड़ा की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में आर्थिक अपराध विंग के कंसलटेंट भी उपस्थित रहे।
बैठक में विदेश भागे अपराधियों की जांच एवं गिरफ्तारी संबंधी प्रक्रिया के बारे में जानकारी दी गई। डीएसपी मित्तल ने बताया कि किस प्रकार अंतरराष्ट्रीय कानूनी सहयोग के माध्यम से विदेश में छिपे अपराधियों का पता लगाकर उन्हें न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया जा सकता है। उन्होंने विभिन्न देशों के साथ सहयोग तंत्र, संपर्क बिंदुओं और समयबद्ध कार्यवाही की महत्ता की भी विस्तृत जानकारी सांझा की। इंटरपोल नोटिसों की भूमिका के बारे में बताया। डीएसपी ने इंटरपोल नोटिसों के उद्देश्य, महत्व और जारी करने की प्रक्रिया से अवगत कराया गया। इसमें रेड कॉर्नर नोटिस, ब्लू कॉर्नर नोटिस अन्य इंटरपोल नोटिस शामिल है।
अधिकारी ने विस्तार में समझाया कि किस परिस्थिति में कौन-सा नोटिस जारी किया जा सकता है तथा यह कैसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपराधियों के लोकेशन ट्रैकिंग एवं गिरफ्तारी में सहायक होते हैं। एलआर और एमएलएटी के माध्यम से विदेशों से जानकारी, बैंक रिकॉर्ड, डिजिटल साक्ष्य तथा अभियोजन हेतु आवश्यक दस्तावेज प्राप्त करने की विस्तृत प्रक्रिया पर चर्चा की गई। इस मीटिंग में संगीता कालिया(संयुक्त आयुक्त), सभी डीसीवी व एसीपी, सभी साईबर अपराध थानों के इंचार्ज व अनुसन्धान अधिकारी तथा जिला गुरुग्राम के विभिन्न थानों के अनुसन्धान अधिकारी सहित अन्य पुलिस अधिकारी/कर्मचारी शामिल हुए।

By Ankshree

Ankit Srivastav (Editor in Chief )

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{“title_results”:[“कर्नाटक सरकार ने बेंगलुरु घनघोर भगदड़ मामले में तीन पुलिस अधिकारियों के खिलाफ मामले वापस लिए”],”content_results”:[“कर्नाटक सरकार ने बेंगलुरु स्टेडियम भगदड़ मामले में तीन आईपीएस अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई हटाईकर्नाटक सरकार ने मंगलवार को 2025 में बेंगलुरु के चिन्नास्वामी स्टेडियम में हुई भगदड़ मामले में तीन भारतीय पुलिस सेवा (IPS) अधिकारियों के खिलाफ चल रही अनुशासनात्मक कार्यवाही को औपचारिक रूप से बंद कर दिया। इस हादसे में 11 लोगों की मौत हुई थी और 50 से अधिक व्यक्ति घायल हुए थे।इस कदम के तहत सरकार ने पूर्व बेंगलुरु पुलिस आयुक्त बी दयानंद, पूर्व अतिरिक्त पुलिस आयुक्त विकाश कुमार विकाश और पूर्व उप पुलिस आयुक्त (सेंट्रल) शेखर एच टेक्कनवर को सभी आरोपों से मुक्त कर दिया। यह निर्णय अधिकारियों की लिखित सफाई और प्रशासनिक विभाग की सिफारिशों की समीक्षा के बाद लिया गया है।यह भगदड़ घटना 4 जून 2025 को चिन्नास्वामी स्टेडियम के गेट नंबर 3 पर हुई थी, जहां रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) की इंडियन प्रीमियर लीग जीत का जश्न मनाने के लिए बड़ी संख्या में प्रशंसक इकट्ठा हुए थे। घटना के तुरंत बाद, सरकार ने पांच पुलिस अधिकारियों को “अश्रीर और लापरवाह” होने के आरोप में निलंबित कर दिया था। इन अधिकारियों में दयानंद, विकाश, टेक्कनवर, असिस्टेंट कमिश्नर ऑफ पुलिस सी बालाकृष्ण और कजबन पार्क इंस्पेक्टर ए के गिरिश शामिल थे।28 जुलाई 2025 को विकाश को छोड़कर अन्य सभी अधिकारियों का निलंबन वापस ले लिया गया था। अतिरिक्त पुलिस आयुक्त विकाश ने इस निलंबन को चुनौती देने के लिए केंद्रीय प्रशासनिक त्रिपाठी न्यायाधिकरण (CAT) का रुख किया, जिसने उनके पक्ष में फैसला सुनाया और सरकार को निर्देश दिया कि वे उनके साथ भी समान व्यवहार करें। इसके बाद राज्य सरकार ने उनकी निलंबन की स्थिति को समाप्त कर दिया।यह निर्णय पुलिस अधिकारियों की जिम्मेदारी और प्रशासनिक प्रक्रिया की गहन जांच के बाद लिया गया है, जिससे स्पष्ट होता है कि मामले में कोई ऐसी लापरवाही नहीं पाई गई जिससे अनुशासनात्मक कार्रवाई आवश्यक हो। इस मामले की समीक्षा से यह भी स्पष्ट हुआ कि पूर्व में लिए गए निर्णयों में न्यायसंगत कारणों की कमी थी।सरकार की यह कार्रवाई न्यायिक प्रक्रिया और तर्कसंगत निर्णय के पक्ष में एक मजबूत संदेश है। साथ ही, यह घटनाओं के प्रति प्रशासनिक जिम्मेदारी और जवाबदेही के मानकों को संतुलित करने का प्रयास भी है।”]}