अब प्रदेश के हर जिले की पहचान उसके खास स्वाद से भी होगी। कैबिनेट ने ‘एक जनपद एक व्यंजन’ योजना को स्वीकृति दे दी है। योजना के तहत लखनऊ की रेवड़ी, आगरा का पेठा, मथुरा का पेड़ा और मेरठ की गजक जैसे सभी जिलों के पारंपरिक व्यंजनों को नई पहचान दी जाएगी। इन व्यंजनों को आधुनिक तकनीक, बेहतर पैकेजिंग और ब्रांडिंग के जरिये देश-विदेश तक पहुंचाया जाएगा। कारीगरों और हलवाइयों को प्रशिक्षण और आर्थिक मदद भी मिलेगी।
इससे न केवल पारंपरिक स्वाद सुरक्षित रहेगा, बल्कि रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे। हर जिले की अपनी अलग पहचान भी मजबूत होगी। सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री राकेश सचान ने बताया कि ‘एक जिला एक उत्पाद’ की सफलता के बाद शुरू की गई यह योजना प्रदेश के पारंपरिक व्यंजनों को नई ऊंचाई देगी। हर जिले के प्रमुख व्यंजन का चयन कर उसे सुरक्षित, मानकीकृत और आधुनिक बनाया जाएगा। इसके तहत गुणवत्ता सुधार, बेहतर पैकेजिंग, आकर्षक ब्रांडिंग पर विशेष काम होगा।
योजना के तहत हलवाइयों, कारीगरों और खाद्य उद्यमियों को तकनीकी प्रशिक्षण दिया जाएगा। साथ ही उन्हें मेलों, पर्वों और प्रदर्शनियों के जरिये बाजार उपलब्ध कराया जाएगा। उद्यमियों को 25 प्रतिशत तक अनुदान (अधिकतम 20 लाख रुपये) दिया जाएगा। इसके लिए वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट में 150 करोड़ रुपये का प्रविधान किया गया है।