एविएशन क्षेत्र संकट के दौर से गुजर रहा है: एयरलाइनों ने केंद्र से तत्काल कदम उठाने की अपील की
भारत के प्रमुख एयरलाइनों – एयर इंडिया, इंडिगो और स्पाइसजेट – ने केंद्र सरकार को अवगत कराया है कि देश का विमानन क्षेत्र ‘‘संचालन बंद करने’’ की कगार पर है। इस संकट की बड़ी वजह पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण जेट ईंधन की बढ़ती कीमतें हैं, जिसके चलते वित्तीय दबाव इतना बढ़ गया है कि एयरलाइनों ने शासन से राहत की मांग की है।
26 अप्रैल को फेडरेशन ऑफ इंडियन एयरलाइंस ने सरकार को लिखे पत्र में कहा है कि वर्तमान परिस्थितियों से निपटने और संचालन जारी रखने के लिए तत्काल और सार्थक आर्थिक सहयोग अनिवार्य है। यह फेडरेशन एयर इंडिया, इंडिगो और स्पाइसजेट का प्रतिनिधित्व करता है।
पश्चिम एशिया में 28 फरवरी से शुरू हुई जंग ने भारत की ऊर्जा आपूर्ति में बाधा उत्पन्न कर दी है, जिससे वैश्विक तेल कीमतों में बढ़ोतरी हुई है और उड़ान मार्गों पर प्रतिबंध से संचालित खर्च भी बढ़ गया है। विमानन टरबाइन ईंधन एयरलाइनों के कुल संचालन खर्च का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा बनता है, जो इस संकट की गहराई को दर्शाता है।
पत्र में फेडरेशन ने नागरिक उड्डयन मंत्रालय से घरेलू तथा अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए एक समान ईंधन मूल्य प्रणाली अपनाने का आग्रह किया है ताकि ईंधन मूल्य निर्धारण में असंगतिता और अनुचित वृद्धि से बचा जा सके। NDTV की रिपोर्ट के अनुसार, फेडरेशन ने कहा कि गलत या असंगत मूल्य निर्धारण के कारण एयरलाइनों को अपार नुकसान होगा और इसका परिणाम फ्लाइट रद्दीकरण और विमानों के ग्राउंडिंग के रूप में होगा।
इसके अतिरिक्त, एयरलाइनों ने हवाई ईंधन पर लगने वाले उत्पाद शुल्क (excise duty) में राहत की भी मांग की है, जिससे उनकी वित्तीय स्थिति में सुधार हो सके। इस मांग के पीछे मकसद है कि वे बिना भारी घाटे के संचालन जारी रख सकें और आम जनता को बेहतर सेवा प्रदान कर सकें।
इस स्थिति में सरकार की भूमिका निर्णायक होगी, क्योंकि यह संकट न केवल एयरलाइनों की स्थिति को बल्कि पूरे देश के आवागमन और व्यापारिक गतिविधियों को प्रभावित कर सकता है। अतः आवश्यक है कि नीति निर्धारकों द्वारा समय पर और प्रभावी कदम उठाए जाएं ताकि विमानन क्षेत्र के सुचारू संचालन की गारंटी दी जा सके।
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