दिल्ली में स्मार्ट एलईडी स्ट्रीट लाइट योजना से होगा रोशनी का क्रांतिकारी बदलाव
नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में सार्वजनिक प्रकाश व्यवस्था का स्वरूप बदलने के लिए सरकार ने एक महत्वाकांक्षी परियोजना की मंजूरी दी है, जिसके तहत लगभग 96,000 स्ट्रीट लाइटों को ऊर्जा-कुशल स्मार्ट एलईडी सिस्टम में परिवर्तित किया जाएगा। यह योजना मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में हुई व्यय वित्त समिति की बैठक में बुधवार को स्वीकृत की गई। लगभग 473.24 करोड़ रुपए की अनुमानित लागत से यह कार्य लोक निर्माण विभाग द्वारा चरणबद्ध रूप से संपन्न किया जाएगा। लक्ष्य है कि दिवाली से पूर्व दिल्ली की प्रमुख सड़कों पर यह नवीनतम प्रकाश व्यवस्था पूरी तरह चलन में आए।
इस परियोजना की घोषणा 2026-27 के बजट में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता द्वारा की गई थी, जिसमें उन्होंने पारंपरिक हाई प्रेशर सोडियम वेपर (एचपीएसवी) लाइटों को उन्नत स्मार्ट एलईडी लाइटों से बदलने का प्रस्ताव रखा था। वर्तमान में, लोक निर्माण विभाग की देखरेख वाली सड़कों पर लगभग 45,000 पुरानी एचपीएसवी और 51,000 एलईडी स्ट्रीट लाइटें लगी हैं, जिनका कुल संख्या करीब 96,000 है। इसके साथ ही 51,160 स्ट्रीट लाइट खंभे शामिल हैं।
मुख्यमंत्री ने परियोजना की आवश्यकता पर कहा कि मौजूदा प्रणालियों में कई कमियां थीं, जैसे वास्तविक समय में निगरानी का अभाव, जिससे खराब लाइटों की पहचान और मरम्मत में देरी होती थी। इस कारण राजधानी के अनेक हिस्सों में अंधकारित क्षेत्र बने रहते थे, जो सुरक्षा के लिहाज से चिंता का विषय था, खासकर महिलाओं की सुरक्षा के लिए। इसके अतिरिक्त वर्तमान प्रणाली में ऊर्जा की अधिक खपत, प्रकाश की असमान गुणवत्ता और प्रकाश प्रदूषण जैसी समस्याएं भी विद्यमान थीं। नई स्मार्ट एलईडी प्रणाली इन समस्याओं को दूर करने हेतु डिज़ाइन की गई है। परियोजना के अंतर्गत सभी पुरानी लाइटों को बदलने के साथ 5,000 नए खंभों की भी स्थापना की जाएगी, ताकि रोशनी से वंचित क्षेत्र भी कवर किए जा सकें।
इस योजना की एक प्रमुख विशेषता केंद्रीकृत कमांड एंड कंट्रोल सेंटर (सीसीसी) होगा, जहां से प्रत्येक स्ट्रीट लाइट की वास्तविक समय में निगरानी की जाएगी और आवश्यकतानुसार लाइटों के संचालन में तेजी लाई जाएगी। इस सेंटर के माध्यम से खराब लाइट की तुरंत पहचान और दूरस्थ नियंत्रण संभव होगा। साथ ही, प्रकाश तीव्रता को 90 प्रतिशत तक बढ़ाने या घटाने की सुविधा भी उपलब्ध होगी, जिससे ऊर्जा की बचत और बेहतर मैनेजमेंट सुनिश्चित होगा। मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि परियोजना के सफल क्रियान्वयन से सरकार को लगभग 25 करोड़ रुपए वार्षिक विद्युत बचत की उम्मीद है, जो अगले पांच वर्षों में और बढ़ेगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस पहल से न केवल दिल्ली की सड़कों पर अंधेरे क्षेत्र समाप्त होंगे, बल्कि महिलाओं की सुरक्षा भी सुदृढ़ होगी, सड़क दुर्घटनाओं में कमी आएगी और राजधानी की ऊर्जा दक्षता में वृद्धि होगी। उन्होंने इस परियोजना को दिवाली से पहले पूर्ण करने का संकल्प दोहराया ताकि त्योहारों के मौसम में पूरे शहर को बेहतर और सुरक्षित प्रकाश में नहाया जा सके। बैठक में सार्वजनिक परिवहन विभाग के मंत्री परवेश साहिब सिंह ने इस योजना के महत्व को देखते हुए इसे एक विशेष नाम देने का सुझाव दिया, जिसे मुख्यमंत्री ने स्वीकार किया।