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दिल्ली अग्निकांड में बड़ा खुलासा

दिल्ली के विवेक विहार में आग पर काबू पाने के बाद दमकल अधिकारियों ने पूरी इमारत का बेहद बारीकी से मुआयना किया। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इमारत की ममटी (छत पर जाने का गेट) की जांच करने पर बड़ी कमी नजर आई। ममटी में हवा आने और जाने का भी रास्ता नहीं था। 

सुरक्षा के दृष्टि से शायद इसे बंद किया गया था। यदि ममटी में वेंटिलेशन होता तो आग लगने पर धुआं जानलेवा बनने के बजाय बाहर निकल जाता। इससे लोगों को बाहर निकलने का वक्त मिल जाता।

धुआं इमारत के फ्लैट के भीतर ही घूमने से कुछ ही देर में लोगों का दम घुट गया। हादसे में बुजुर्ग किराना कारोबारी अरविंद जैन, इनकी पत्नी अनीता, बेटा निशांक, बहू आंचल और पोता आनु फ्लैट से बाहर भी नहीं निकल सके। 

चौथी मंजिल पर मौजूद नितिन जैन, इनकी पत्नी शैली और बेटा सम्यक के शव भी सीढ़ियों पर पड़े मिले। अंदेशा जताया जा रहा है कि अग्निकांड की चपेट में आने से पहले धुएं की चपेट में आने से यह लोग बेहोश हो गए होंगे। 

अधिकारी ने बताया कि धुआं बाहर निकल गया होता तो ये लोग इतनी जल्दी बेसुध नहीं होते और इन्हें सामने वाले फ्लैट में जाकर अपनी जान बचाने का मौका मिल जाता। धुआं और हीट ने उनका रास्ता ब्लॉक कर दिया और वह वहीं पर फंस गए, जिसकी वजह से उनकी मौत हो गई।

विवेक विहार में 800 गज की जिस इमारत में आग लगी उसमें 400-400 गज के दो फ्लैट आगे-पीछे करके बने हैं। चौथी मंजिल के फ्लैट मालिकों के पास अपनी-अपनी छत है। हादसे में जान गंवाने वाले नितिन जैन के परिवार के पास ही छत की चाबी रहती थी। इमारत में जब आग लगी तो उन्होंने अपने फ्लैट से निकलकर छत पर जाने का प्रयास किया।

पुलिस सूत्रों का कहना है कि परिवार के पास चाबी होने के बावजूद वह ममटी पर लगे ताले को खोल नहीं पाए। अंदेशा है कि इससे पहले परिवार दरवाजे तक पहुंच पाता, वह उससे पहले ही अचेत होकर गिर गया। बाद में आग ऊपर पहुंची तो तीनों के शरीर झुलस गए। 

वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही पता चल पाएगा कि इन लोगों की मौत झुलसने की वजह से हुई है या फिर दम घुटने की वजह से, मामले की जांच जारी है। हालांकि वरिष्ठ अधिकारी यह नहीं बता रहे हैं कि तीनों मृतकों के पास उस समय चाबी थी या नहीं। अधिकारी जांच की बात कर रहे हैं।

By Ankshree

Ankit Srivastav (Editor in Chief )