मुंबई में अवैध स्कूलों के छात्रों के पुनर्वास में महाराष्ट्र सरकार और BMC की चुनौतियाँ
महाराष्ट्र सरकार ने गुरुवार, 25 जून को विधान परिषद में स्वीकार किया कि मुंबई में अवैध स्कूलों से छात्रों को नगर निगम के नियमित स्कूलों में स्थानांतरित करने में उन्हें कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। बीएमसी द्वारा 2025-2026 शैक्षणिक वर्ष के दौरान 164 अवैध प्राथमिक स्कूल पाए जाने के बाद उन्हें बंद करने के आदेश दिए गए थे।
स्कूल शिक्षा मंत्री दादाजी भुसे ने यह जानकारी भाजपा सदस्य श्रीकांत भारतीय और शिवसेना सदस्यों सचिन आहिर एवं अनिल परब द्वारा उठाए गए प्रश्नों के लिखित उत्तर में दी। उन्होंने बताया कि समस्या का मुख्य कारण यह है कि नगर निगम स्कूल पहले से ही दो पालियों में चल रहे हैं और घनी आबादी वाले स्लम इलाकों की सेवा कर रहे हैं।
ये अवैध स्कूल मुंबई और आसपास के क्षेत्रों में पाए गए हैं, जिनमें से 145 अंग्रेज़ी माध्यम स्कूल हैं। अधिकांश स्कूल देोनार, मानखुर्द, मालाड़, कांदिवली और कुरला में स्थित हैं। देोनार और मानखुर्द मिलाकर 65 स्कूल हैं, मालाड़ में 25 हैं जबकि कुरला और कांदिवली में 12-12 अवैध स्कूल पाए गए हैं।
भुसे ने सदन को सूचित किया कि पिछले वर्षों की तुलना में अवैध स्कूलों की संख्या कम हुई है। 2022-2023 शैक्षणिक वर्ष के दौरान मुंबई में 210 अनाधिकृत स्कूल पहचाने गए थे।
पिछले सप्ताह मुंबई पुलिस ने गोवनदी में तीन अनधिकृत स्कूलों के प्राचार्य, सचिव और प्रबंधन के खिलाफ मामला दर्ज किया। ये स्कूल विभिन्न ट्रस्टों और एक फाउंडेशन द्वारा संचालित हैं और वाणिज्य विभाग द्वारा बंद करने के आदेशों के बावजूद संचालन जारी रखा।
बीएमसी ने 53 स्कूलों के खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई शुरू की है जो सरकारी मंजूरी के बिना काम कर रहे हैं। ये सभी स्कूल शहर के स्लम क्षेत्रों में हैं और शिकायतों के बाद मामले दर्ज किए गए हैं।
पूर्व भाजपा सांसद किरीट सोमैया ने एम-ईस्ट वार्ड में अवैध स्कूलों को लेकर भी चिंता जताई, जिसमें गोवनदी, मानखुर्द और देोनार के कुछ हिस्से शामिल हैं। उन्होंने कहा कि बीएमसी शिक्षा विभाग द्वारा पिछले चार शैक्षणिक वर्षों में घोषित 849 अनधिकृत स्कूलों में से 34 प्रतिशत इसी वार्ड में हैं, जिससे इस वार्ड के कुल अवैध स्कूलों की संख्या 289 हो गई है।
सोमैया ने सोमवार को बीएमसी आयुक्त अश्विनी भिड़े को लिखे पत्र में कहा कि बीएमसी द्वारा नियमित तौर पर अवैध स्कूलों की सूची प्रकाशित करने और नोटिस जारी करने के बावजूद भी कई स्कूल संचालित हो रहे हैं।