मुंबई के किंग एडवर्ड मेमोरियल अस्पताल का नाम बदलने पर विवाद
स्वतंत्रता के 79 वर्षों बाद भी मुंबई में कुछ उपनिवेशकालीन नाम मौजूद हैं। महाराष्ट्र के मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा द्वारा किंग एडवर्ड मेमोरियल (KEM) अस्पताल का नाम बदलने का प्रस्ताव रखा गया है, जिससे एक नया बहस शुरू हो गई है।
प्रशासनिक और राजनीतिक स्तर पर यह विषय गरमाया हुआ है क्योंकि किंग एडवर्ड नाम को कई लोग उपनिवेशवादी शासन की निशानी मानते हैं। वर्ष 2008 में मुंबई हमलों के संदर्भ में, मंत्री लोढ़ा ने किंग एडवर्ड को ‘‘किंग कसाब’’ करार दिया, जो भारत के लिए विनाशकारी था।
दूसरी ओर, शिवसेना के कुछ सदस्यों ने इसका विरोध किया है। उनके अनुसार, अस्पताल के नाम के पीछे इतिहास और एडवर्ड की स्वास्थ्य क्षेत्र में योगदाने को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। शिवसेना के पूर्ववर्तियों ने तो 1995 में मुंबई के नामकरण का भी समर्थन किया था।
ऐतिहासिक विशेषज्ञ मानते हैं कि ऐसे उपनिवेशकालीन नाम केवल विवादास्पद हस्तियों की याद दिलाते नहीं हैं, बल्कि यह भी सूचित करते हैं कि हमारा अतीत जटिल और बहुआयामी था। ऐसे नाम इतिहास के उन पहलुओं को भी प्रतिबिंबित करते हैं जिन्हें राजनीतिक नजरिए से समझना आवश्यक है।
इस विषय पर निर्णय जल्द ही आने की संभावना है क्योंकि स्थानीय प्रशासन और राजनीतिक दलों के बीच संवाद जारी है। नाम परिवर्तन के पीछे राष्ट्रीय पहचान और ऐतिहासिक संवेदनाओं का मेल आवश्यक है।