यीडा के सीईओ राकेश कुमार सिंह ने बताया कि बीसीएएस ने सिक्योरिटी वैटिंग अप्रूवल दे दिया है। यह एयरपोर्ट पर यात्रियों और अन्य सेवाओं के लिए जरूरी सुरक्षा उपाय के परीक्षण के बाद की महत्वपूर्ण अनुमति है। इससे सीधे तौर पर एयरोड्रम लाइसेंस मिलने का रास्ता खुल गया है। सितंबर में एयरपोर्ट का काम पूरा होने के बाद से ही एयरोड्रम लाइसेंस के लिए यापल और नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड (नायल) के अधिकारी जुटे हैं।
बुधवार को ही नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर लगे एंटी हाइजैकिंग उपकरण के लिए बनी योजना को बीसीएएस ने मंजूरी दी थी। नायल के नोडल अधिकारी शैलेंद्र भाटिया ने बताया कि एयरपोर्ट की सुरक्षा के लिए एंटी हाइजैक कंटिजेंसी प्लान बेहद महत्वपूर्ण होता है। विमान के हाइजैक होने या उसमें बम होने की जानकारी मिलने के तुरंत बाद यह प्लान लागू हो जाता है। इसके बाद प्लान में तय हुए प्रोटोकॉल के मुताबिक कार्रवाई करनी होती है। इस एंटी हाइजैकिंग कंटिंजेंसी प्लान में विमान कंपनी, एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया, सुरक्षा एजेंसियां, स्थानीय आपदा प्रबंधन समिति और शासन की अन्य एजेंसियां काम करती हैं।

