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ग्रेटर नोएडा: मोमबत्ती की रोशनी में पढ़ रहे बच्चे

ग्रेटर नोएडा वेस्ट स्थित अजनारा होम्स में रहने वाले युवक को मेंटेनेस प्रबंधन से बिलजी का बिल मांगना महंगा पड़ गया।प्रबंधन की ओर से उनके घर की बिजली काट दी गई। इस वजह से उनके परिवार को चार दिनों से अंधेरे में रहना पड़ रहा है। उमस भरी गर्मी में बच्चे परेशान हैं। उन्हें मोमबत्ती की रोशनी में पढ़ना पड़ रहा है। निवासी का आरोप है कि उन्होंने जिलाधिकारी से मामले की शिकायत की थी। शिकायत के बाद डीएम कार्यालय की टीम सोसाइटी में पहुंची। मेंटेनेंस प्रबंधन ने उनसे भी कहा है कि वह बिजली का बिल नहीं देंगे।

सोसाइटी के ए टॉवर के 1505 में रहने वाले शिव कुमार रंजन ने बताया कि बिजली के मीटर से कैम चार्ज के नाम पर अवैध वसूली की जा रही है। उन्होंने बताया कि विरोध करने पर तीन अगस्त को सुबह 11 बजे बिना किसी पूर्व सूचना के बिजली काट दी गई। बिजली नहीं आने के कारण उनके दो छोटे बच्चों को काफी परेशानी हो रही हैं। एक बच्चे की मानसिक स्थिति अच्छी नहीं है। एम्स में उसका इलाज चल रहा है। उन्होंने प्रबंधन पर प्रताड़ना का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा है कि यदि आप लीगल जाओगे तो हम आपको इसी तरह से प्रताड़ना करते रहेंगे और आपकी इलेक्ट्रिसिटी इसी तरह काटी जाएगी। उन्होंने मामले की जांच कराने की मांग की है। उन्होंने कहा है कि जब तब तक मामले की जांच न हो जाए तब तक बिजली न काटे जाने का आदेश दिया जाए, जिससे हमारे मौलिक अधिकारों का हनन न हो। मेंटेनेंस टीम के सदस्य हेमंत राणा ने कहा कि करीब चार लाख रुपये बकाया है। पिछले तीन साल से बिल जमा नहीं किया है।

By Ankshree

Ankit Srivastav (Editor in Chief )

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{“title_results”:[“कर्नाटक सरकार ने बेंगलुरु घनघोर भगदड़ मामले में तीन पुलिस अधिकारियों के खिलाफ मामले वापस लिए”],”content_results”:[“कर्नाटक सरकार ने बेंगलुरु स्टेडियम भगदड़ मामले में तीन आईपीएस अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई हटाईकर्नाटक सरकार ने मंगलवार को 2025 में बेंगलुरु के चिन्नास्वामी स्टेडियम में हुई भगदड़ मामले में तीन भारतीय पुलिस सेवा (IPS) अधिकारियों के खिलाफ चल रही अनुशासनात्मक कार्यवाही को औपचारिक रूप से बंद कर दिया। इस हादसे में 11 लोगों की मौत हुई थी और 50 से अधिक व्यक्ति घायल हुए थे।इस कदम के तहत सरकार ने पूर्व बेंगलुरु पुलिस आयुक्त बी दयानंद, पूर्व अतिरिक्त पुलिस आयुक्त विकाश कुमार विकाश और पूर्व उप पुलिस आयुक्त (सेंट्रल) शेखर एच टेक्कनवर को सभी आरोपों से मुक्त कर दिया। यह निर्णय अधिकारियों की लिखित सफाई और प्रशासनिक विभाग की सिफारिशों की समीक्षा के बाद लिया गया है।यह भगदड़ घटना 4 जून 2025 को चिन्नास्वामी स्टेडियम के गेट नंबर 3 पर हुई थी, जहां रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) की इंडियन प्रीमियर लीग जीत का जश्न मनाने के लिए बड़ी संख्या में प्रशंसक इकट्ठा हुए थे। घटना के तुरंत बाद, सरकार ने पांच पुलिस अधिकारियों को “अश्रीर और लापरवाह” होने के आरोप में निलंबित कर दिया था। इन अधिकारियों में दयानंद, विकाश, टेक्कनवर, असिस्टेंट कमिश्नर ऑफ पुलिस सी बालाकृष्ण और कजबन पार्क इंस्पेक्टर ए के गिरिश शामिल थे।28 जुलाई 2025 को विकाश को छोड़कर अन्य सभी अधिकारियों का निलंबन वापस ले लिया गया था। अतिरिक्त पुलिस आयुक्त विकाश ने इस निलंबन को चुनौती देने के लिए केंद्रीय प्रशासनिक त्रिपाठी न्यायाधिकरण (CAT) का रुख किया, जिसने उनके पक्ष में फैसला सुनाया और सरकार को निर्देश दिया कि वे उनके साथ भी समान व्यवहार करें। इसके बाद राज्य सरकार ने उनकी निलंबन की स्थिति को समाप्त कर दिया।यह निर्णय पुलिस अधिकारियों की जिम्मेदारी और प्रशासनिक प्रक्रिया की गहन जांच के बाद लिया गया है, जिससे स्पष्ट होता है कि मामले में कोई ऐसी लापरवाही नहीं पाई गई जिससे अनुशासनात्मक कार्रवाई आवश्यक हो। इस मामले की समीक्षा से यह भी स्पष्ट हुआ कि पूर्व में लिए गए निर्णयों में न्यायसंगत कारणों की कमी थी।सरकार की यह कार्रवाई न्यायिक प्रक्रिया और तर्कसंगत निर्णय के पक्ष में एक मजबूत संदेश है। साथ ही, यह घटनाओं के प्रति प्रशासनिक जिम्मेदारी और जवाबदेही के मानकों को संतुलित करने का प्रयास भी है।”]}