27 फरवरी को निचली अदालत ने केजरीवाल, सिसोदिया और 21 अन्य को शराब नीति मामले में बरी कर दिया था। निचली अदालत ने कहा था कि यह मामला न्यायिक जांच में टिकने में पूरी तरह असमर्थ है। 9 मार्च को उच्च न्यायालय ने सीबीआई के जांच अधिकारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की सिफारिश पर रोक लगा दी थी। न्यायमूर्ति शर्मा ने कहा था कि निचली अदालत की कुछ टिप्पणियां प्रथम दृष्टया त्रुटिपूर्ण प्रतीत होती हैं। न्यायाधीश को हटाने की मांग
केजरीवाल, सिसोदिया और अन्य ने न्यायाधीश को हटाने की मांग करते हुए आवेदन किया था। उन्होंने हितों के टकराव और पूर्वाग्रह की आशंका का आरोप लगाया। उनका दावा था कि न्यायाधीश के बच्चे केंद्र सरकार के वकील हैं, जो सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से काम पाते हैं। 20 अप्रैल को न्यायमूर्ति शर्मा ने इस याचिका को खारिज कर दिया, यह कहते हुए कि न्यायाधीशों को निराधार आशंकाओं के कारण खुद को अलग नहीं करना चाहिए। प्रवर्तन निदेशालय की याचिका भी 4 मई को सूचीबद्ध की गई है।

