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मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की खंडपीठ ने आईटी (मध्यस्थ दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम 2021 का हवाला देते हुए कहा कि गूगल और एप्पल जैसे मध्यस्थों की जिम्मेदारी केवल शिकायत मिलने पर ही नहीं, बल्कि ऐसे ऐप्स को अपलोड होने के समय ही उचित जांच (ड्यू डिलीजेंस) करना है।
पीठ ने कहा, इन ऐप्स की व्यापक पहुंच को देखते हुए मध्यस्थों को आईटी नियम 2021 के तहत महत्वपूर्ण भूमिका निभानी होगी। उन्हें न केवल शिकायत पर कार्रवाई करनी चाहिए, बल्कि अपलोड के समय भी सतर्क रहना चाहिए। यह आदेश एक जनहित याचिका (पीआईएल) पर सुनवाई के दौरान दिया गया।
याचिका में आरोप लगाया गया था कि गूगल प्ले स्टोर और एप्पल ऐप स्टोर पर कई ऐसे ऐप उपलब्ध हैं जो पोर्नोग्राफिक सामग्री, अनैतिक तस्करी, वेश्यावृत्ति, नशीले पदार्थों के दुरुपयोग, अवैध हथियारों की तस्करी और संगठित अपराध को बढ़ावा देते हैं।
याचिकाकर्ता के वकील तन्मय मेहता ने कहा कि ये ऐप्स ऐसे आपराधिक कार्यों से करोड़ों डॉलर कमा रहे हैं। केंद्र सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा ने याचिका का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि सरकार अकेले दुनिया भर में सब कुछ ब्लॉक नहीं कर सकती, इसलिए मध्यस्थों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है।
अदालत ने गूगल, एप्पल और भारतीय कंप्यूटर आपातकालीन प्रतिक्रिया टीम को निर्देश दिया कि वे ऐसे एप्स के प्रसार को तुरंत रोकें और 2021 के आईटी नियमों का पालन करें। साथ ही, अगली सुनवाई (जुलाई में) तक की गई कार्रवाई की रिपोर्ट दाखिल करने को कहा है।
दिल्ली: अदालत ने गूगल, एप्पल और भारतीय कंप्यूटर आपातकालीन प्रतिक्रिया टीम को निर्देश
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मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की खंडपीठ ने आईटी (मध्यस्थ दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम 2021 का हवाला देते हुए कहा कि गूगल और एप्पल जैसे मध्यस्थों की जिम्मेदारी केवल शिकायत मिलने पर ही नहीं, बल्कि ऐसे ऐप्स को अपलोड होने के समय ही उचित जांच (ड्यू डिलीजेंस) करना है।
पीठ ने कहा, इन ऐप्स की व्यापक पहुंच को देखते हुए मध्यस्थों को आईटी नियम 2021 के तहत महत्वपूर्ण भूमिका निभानी होगी। उन्हें न केवल शिकायत पर कार्रवाई करनी चाहिए, बल्कि अपलोड के समय भी सतर्क रहना चाहिए। यह आदेश एक जनहित याचिका (पीआईएल) पर सुनवाई के दौरान दिया गया।
याचिका में आरोप लगाया गया था कि गूगल प्ले स्टोर और एप्पल ऐप स्टोर पर कई ऐसे ऐप उपलब्ध हैं जो पोर्नोग्राफिक सामग्री, अनैतिक तस्करी, वेश्यावृत्ति, नशीले पदार्थों के दुरुपयोग, अवैध हथियारों की तस्करी और संगठित अपराध को बढ़ावा देते हैं।
याचिकाकर्ता के वकील तन्मय मेहता ने कहा कि ये ऐप्स ऐसे आपराधिक कार्यों से करोड़ों डॉलर कमा रहे हैं। केंद्र सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा ने याचिका का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि सरकार अकेले दुनिया भर में सब कुछ ब्लॉक नहीं कर सकती, इसलिए मध्यस्थों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है।
अदालत ने गूगल, एप्पल और भारतीय कंप्यूटर आपातकालीन प्रतिक्रिया टीम को निर्देश दिया कि वे ऐसे एप्स के प्रसार को तुरंत रोकें और 2021 के आईटी नियमों का पालन करें। साथ ही, अगली सुनवाई (जुलाई में) तक की गई कार्रवाई की रिपोर्ट दाखिल करने को कहा है।

