दिल्ली जल बोर्ड का दिल्ली वालों पर कुल 1.42 लाख करोड़ रुपए बकाया है। इसमें घरेलू उपभोक्ताओं पर 15 हजार करोड़ रुपए बकाया है। जल बोर्ड ने अलग-अलग सेक्टर के बड़े बकाएदार।
delhi जल बोर्ड ने दिल्ली में पानी के बकाया बिल को लेकर उपडट दिया है।
जल बोर्ड के अधिकारी ने बताया है कि दिल्ली में कस्टमरस पर कुल 1.42 लाख करोड़ बकाया है। इसमें 15,000 करोड़ रुपए घरेलू उपभोक्ताओं पर बकाया है जिसका कुल बकाया का 10.5 प्रतिशत हैं।
घरेलू कस्टमरस के अलावा भी कई बड़े उद्योगों का जल बोर्ड पर पैसा बकाया है । इसको लेकर जल बोर्ड ने लिस्ट जारी की है
। पानी के बिलों को लेकर विवाद की वजह से बहुत से उपभोक्ता बकाया जमा नहीं कर रहे हैं। इसकी वजह से जल बोर्ड को काफी नुकसान झेलना पड़ रहा है।दिल्ली जल बोर्ड के मुताबिक, इन उपभोक्ताओं में घरेलू वर्ग के लोगों से ज्यादा कमर्शियल सेक्टर के उपभोक्ताओं पर बकाया है। इसको लेकर DJB ने एक रिपोर्ट जारी किया है। आइए जानते हैं सबसे ज्यादा किस सेक्टर के उपभोक्ताओं का सबसे ज्यादा बिल बकाया है..
किन उपभोक्ताओं पर कितना बकाया
दिल्ली जल बोर्ड के एक अधिकारी ने बताया कि उपभोक्ताओं को 3 अलग-अलग कैटेगरी में बांटा गया है। इसमें कमर्शियल सेक्टर पर DJB का कुल 66 हजार करोड़ रुपए बकाया है। इसके बाद दूसरे नंबर पर सरकारी विभाग हैं, जिन पर कुल 61 हजार करोड़ रुपए का बकाया है। वहीं, घरेलू उपभोक्ताओं पर दिल्ली जल बोर्ड का बकाया 15 हजार करोड़ रुपए हैं। दिल्ली जल बोर्ड के कुल पेंडिंग बिलों में घरेलू उपभोक्ताओं पर सिर्फ 10.5 फीसदी बकाया है।
दिल्ली सरकार के मंत्री प्रवेश वर्मा ने जानकारी देते हुए बताया कि इन विवादित बिलों को निपटाने के लिए पानी बिल माफी योजना पर तेजी से काम किया जा है। अगले 2 महीने के अंदर इस योजना को लागू कर दिया जाएगा। बताया जा रहा है कि इस योजना का लाभ सिर्फ घरेलू उपभोक्ताओं को दिया जाएगा।
1 साल में बढ़े 4 लाख से ज्यादा पेंडिंग बिल
दिल्ली में लगभग 29 लाख पानी कनेक्शन हैं। इनमें से बहुत से उपभोक्ताओं ने पानी का बिल जमा नहीं किया है। इन उपभोक्ताओं का दावा है कि उनका वाटर बिल ज्यादा है, जबकि उन्होंने पानी का कम इस्तेमाल किया है। दिल्ली जल बोर्ड के एक अधिकारी ने बताया कि पिछले कुछ सालों में विवादित बिलों की संख्या में काफी ज्यादा बढ़ोतरी हुई है।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, फरवरी, 2024 तक ऐसे उपभोक्ताओं की संख्या 10.68 लाख थी। वहीं, अब ऐसे उपभोक्ताओं की संख्या 14-15 लाख पहुंच गई है। इसका मतलब है कि पिछले एक साल के दौरान के पेंडिंग बिलों वाले उपभोक्ताओं की संख्या में 4 लाख 22 हजार का इजाफा हुआ है।


